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कैसे मिले नक्सलियों की सूचना, जब रक्षक ही नहीं…

by bnnbharat.com
April 3, 2021
in समाचार
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से परेशान है पुलिस प्रशासन
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👉 झारखंड में पुलिस के चौकीदार अंचल और वीडियो कार्यालय में बजा रहे हैं ड्यूटी

👉 अधिकांश चौकीदारों की सेवा ब्लॉक व अंचल कार्यालय के अधिकारियों के पास

रांची: झारखंड में पुलिस के चौकीदार अंचल और वीडियो कार्यालय में ड्यूटी बजा रहे हैं, इसकी वजह से ग्रामीण इलाकों की सूचनाएं थाने में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारियों को नहीं मिल पा रही है. इसका असर नक्सली अभियान पर पड़ रहा है.

गांव में चौकीदार की नियुक्ति इस कारण से की जाती है कि उस इलाके की सूचना पुलिस को मिल सके. मसलन ग्रामीण क्षेत्र में कौन बाहरी व्यक्ति घूम रहा है, क्या गतिविधि है, नक्सली दस्ता है या नहीं, या फिर अपराधियों की टीम तो नहीं है. यही चौकीदार इन तमाम गतिविधियों की सूचना थानेदार तक पहुंचाते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है.

अधिकांश चौकीदारों को ब्लॉक या अंचल कार्यालय में पदस्थापित अधिकारियों की सेवा में लगा दिया गया है. कई चौकीदार तो बड़े अफसरों के घरों में भेज दिए गए हैं. यही वजह है कि अपराधी या नक्सली गतिविधियों की सूचना पुलिस को नहीं मिल पा रही है.

गुमला के उग्रवाद ग्रस्त इलाकों में स्थिति और भयावह है यह जिला लातेहार और लोहरदगा से सटा हुआ है. वहीं दूसरे छोर की सीमा छत्तीसगढ़ से लगी हुई है, यह सभी नक्सलियों के गढ़ हैं.

इन जिलों के चौकीदार सूचना संग्रह करने के बजाए दूसरे कार्यों में लग गए हैं. इनका वेतन पुलिस के फंड से मिलता है. चौकीदारों को महामारी अग्निकांड, फसल की स्थिति, पशु रोग, भ्रमण सील, अपराधिक और नक्सली गिरोह, सरकारी संपत्ति को नुक्सान करने वाले, गांव की स्थिति, पशुओं को जहर देने वाले व्यक्ति की सूचना तुरंत उपलब्ध करानी होती है. साथी ही पकड़े गए अपराधी और नक्सलियों की पहचान भी इन्हीं को करनी होती है.

गुमला के बिशनपुर थाने में जांच इलाके के सर्किल इंस्पेक्टर ने की. जांच में पता चला कि चौकीदार उमेश माली और इमली अंचल कार्यालय में प्रतिनियुक्त है, जो नियम के विरुद्ध है. इसके बाद बिशुनपुर थाना के चौकीदारों को वापस थाना में पदस्थापित करने का निर्देश दिया गया है.

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