उत्तर प्रदेश: डर और दहशत का दूसरा नाम बन चुके कोरोना से लड़ रहे देश में लॉकडाउन है. वहीं लॉकडाउन का असर गरीबों की जिदंगी पर साफ पड़ रहा है. ताजा मामला शनिवार को फर्रुखाबाद में सामने आया है, जहां आर्थिक तंगी से परेशान होकर युवक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. वहीं डीएम का दावा है कि राशन उसके घर पर भरपूर था, लेकिन मानसिक रूप से परेशान होकर युवक ने खुदुकुशी की.
बता दें कि फर्रुखाबाद में अभी तक कोरोना पॉजिटिव का कोई भी केस सामने नहीं आया है. लेकिन लाकडाउन के कारण रोजगार छिन जाने से भुखमरी की कगार पर जा पहुंचे एक मजदूर ने आम के बाग में फांसी लगाकर जान दे दी. जानकारी के मुताबिक गांव हईपुर में चुन्नीलाल बाथम मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था. लेकिन पिछले एक माह से काम बंद था.
बताया जा रहा है कि चुन्नीलाल रोजगार न होने के कारण अपने परिवार का भरण-पोषण करने में अक्षम साबित हो रहा था. इसकारण आए दिन घर में कलह हो रही थी,इसके बाद चुन्नीलाल डिप्रेशन में चला गया था. इस कारण परेशान होकर फांसी लगाकर जान दे दी. परिजनों के अनुसार, चुन्नीलाल के घर पर खाने को कुछ भी नहीं था. वहीं उसके पास खेत व मकान नहीं हैं. लॉकडाउन से पहले वह बनारस काम करने गया था, लेकिन लॉकडाउन जारी होने के बाद वापस घर आ गया था.
बता दें कि चुन्नीलाल शुक्रवार को घर नहीं पहुंचा, तब उसकी 7 वर्षीय बेटी सलोनी और 4 वर्षीय बेटा आयुष उनकी तलाश करने निकले. गांव के बगीचे में पेड़ से पिता का शव लटकता देखकर होश उड़ गए. उन्होंने तत्काल मां कमला देवी को सूचना दी. मामले में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि एसडीएम को जानकारी दी है. कार्ड धारक चुन्नीलाल को 35 किलो अनाज निःशुल्क मिला था. इसके अलावा 15 अप्रैल के बाद 10 किलो चावल भी दिया गया था.

