रांची:- गोस्सनर कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया जहां कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. रश्मि के द्वारा प्रार्थना से हुई. इसके पश्चात दीप प्रज्वलन किया गया. वही स्वागत गीत प्रो.मीना सुरीन एवं ग्रुप के द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा डॉ अनिमा हांसदा द्वारा महिला सेल का वार्षिक रिपोर्ट पढ़ा गया .इसके पश्चात प्रो. रश्मि ऐंड ग्रुप के द्वारा “बेखौफ आजाद है जीना मुझे” गीत की प्रस्तुति दी गई. वही प्रो.आशा रानी केरकेट्टा ने हिंदी साहित्य में महिलाओं के योगदान के बारे में बताया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ आशा लता लिंडा ने सभी को संबोधित करते हुए यह कहा कि यह पूरा विश्व महिलाओं के कारण ही उन्नति कर रहा है इसीलिए हमें उन्हें हर कदम सराहना चाहिए हर पल सम्मान देना चाहिए.वही कॉलेज के प्राचार्य डॉ रॉयल डांग ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन उन सभी महिलाओं से प्रेरणा लेने का दिन है जो अपने घर के साथ साथ दुनियादारी को भी संभाल रही हैं चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो, शिक्षा का क्षेत्र हो या कोई और क्षेत्र. वहीं डॉ नीलिमा सिन्हा ने महिला दिवस प्रकाश डाला . स्नेहा एंड ग्रुप ने “जीते हैं चल” गीत की प्रस्तुति दी. प्रो.सुषमा केरकेट्टा ने फेमिनिज्म के बारे में बताते हुए कहा कि फेमिनिज्म का कतई मतलब नहीं की पुरुषों को गलत समझा जाए बल्कि उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है. साथ ही डॉ मीना तिर्की ने महिला सम्मान में सभी को संबोधित किया और प्रो.डिंपल डायना मिंज ने महिला दिवस से संबंधित क्विज भी कराया .वहीं प्रो. अनीता अंजू खेस ने भी महिला दिवस पर अपने विचार प्रकट किए . इसके बाद प्रो रश्मि एंड ग्रुप ने गीत की प्रस्तुति दी. इसके पश्चात साहित्य में आदिवासी महिलाओं का योगदान के बारे में डॉ ईवा हांसदा ने प्रकाश डाला. कार्यक्रम में जनसंचार विभाग के द्वारा वीडियो डिस्प्ले किया गया. वहीं कॉलेज की उन तीन शिक्षिकाएं डॉक्टर अनीमा हांसदा, डॉ ज्योति टोप्पो और प्रो. इलानी पूर्ति का सम्मान किया जिंहोने साड़ी की परंपराओं को बचाए रखे हैं. कार्यक्रम में गैर शिक्षण कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया. वही इस कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. बिंदु सोरेंग ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ सीमा टेटे के द्वारा किया गया. कार्यक्रम में कॉलेज के सभी विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद थे.

