गजल
न अच्छा आदमी हूँ मैं, न अच्छी बात करता हूँ।
मगर इतना तो है मुझमें,कि सच्ची बात कहता हूँ।
मैं उनके बोल ही बोलूँ ,ये कहना आलिमों का था,
कोई तोता नही हूँ मैं,मैं अपनी बात रखता हूँ।1।
तू अपना इल्म,अपने पास रख दुनिया तो बेहतर है,
मैं अपनी बेवकूफी में बहुत मशगूल रहता हूँ।2।
अभी कम है उमर मेरी,अभी मालुम नही ज्यादा,
मगर जो झूठ बिकता है,उस मैं भी समझता हूँ।3।
ये खतरों से भरे रस्ते,जहाँ सब लोग डरते हैं,
बुरी आदत है मेरी,मैं इन्हीं रस्तों में चलता हूँ।4।
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