रांची: सीएम हेमंत के पूर्व राजनीतिक सलाहकार हिमांशु शेखर चौधरी ने कहा कि हाजी साहब का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत आघात है. उम्र में मुझ से काफी बड़े होने के बावजूद वो सदैव मुझ से मित्रवत व्यवहार रखते थे. जब भी उन्हें किसी विषय पर किसी प्रकार की सलाह मशविरा करनी होती तो वो घर आ जाते या फोन कर लंबी बातचीत करते. हाल के दिनों की ही बात है.
मदरसा शिक्षकों के वेतन और पेंशन से संबंधित मुद्दे पर उन्होंने मुझसे लंबी बातचीत की. जिसमें किसी मुद्दे के समाधान के प्रति उनकी बेचैनी दिखी. मुझे आज वर्ष 2013 की बातें याद आती है जब हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री और मैं मुख्यमंत्री का राजनीतिक सलाहकार हुआ करता था.
बहुत सारे मदरसों को सरकारी अनुदान तकनीकी कारणों से नहीं मिल रहा था. हाजी साहब मुझसे सदैव इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से बात कर कोई रास्ता निकालने को लेकर लगभग हर रोज बात करते और दवाब बनाते थे.
तात्कालिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक मैंने हाजी साहब की बेचैनी पहुंचाई. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मुद्दे के हल के लिये काफी जद्दोजहद के बाद जिन मदरसों को सरकारी अनुदान नहीं मिल रहा था, उन्हें अनुदान मिले इसके लिए सरकारी अड़चनों को दूर करने संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट से पारित किया गया.
मुझे याद है कैबिनेट से प्रस्ताव होने के तुरंत बाद हाजी साहब मेरे गले लग गए और उन्होंने मुझ से कहा कि हिमांशु जी आपके प्रयास के लिए आपको मैं शेरवानी भेंट करूंगा. मैं अब भी उनसे शेरवानी की बात छेड़ता रहता था ,वो सदैव मुस्कुरा कर कहते कि हिमांशु जी आपको मैं सूट दूंगा, क्योंकि शेरवानी आपके शरीर पर अच्छा नहीं लगेगा.
हाल में ही बात होने पर उन्होंने कहा कि जल्द आपके घर आऊंगा, क्योंकि कई मुद्दों पर आपकी सलाह और मशविरा लेनी है. हाजी साहब आपने घर आने का वादा करके हम सबसे विदा ले लिया. अब आप तो नहीं आयेंगे हाजी साहब लेकिन आपकी सादगी, आपका सरल स्वभाव और मुस्कुराता चेहरा सदैव याद आता रहेगा.

