खास बातें:-
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सात में से चार आईपीएएस हैं राजनीति के मेन स्ट्रीम में, दो को अब तक नहीं मिल पाया है एक्सपोजर
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सिर्फ एक आईएएस ज्योति भ्रमर तुबिद ही सक्रिय राजनीति में हैं, फिलहाल बीजेपी के हैं प्रदेश प्रवक्ता
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राजनीति के मेन स्ट्रीम में एक ही आईएएस
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कुछ आईएएस राजनीति में तो आए पर उन्हें एक्सपोजर नहीं मिल सका
रांचीः झारखंड कैडर के आईएएस और आईपीएस की राजनीति में धमाकेदार एंट्री रही है. आठ आईपीएस वीआरएस व रिटायरमेंट के बाद राजनीति के अखाड़े में आए. इसमें कुछ चल पाए और कुछ साइडलाइन हो गए. इसके पीछे वजह रही है कि राजनीति दलों में इन्हें सही जगह नहीं मिल पाई. फिलहाल एडीजी रेजी डुंगडुंग ने वीआरएस लेकर सक्रिए राजनीति में जाने का मन बना लिया है. सूत्रों के अनुसार वे कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं.
चार आईपीएस है राजनीति के मेन स्ट्रीम में
आईपीएस रामेश्वर उरांव झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं. कुछ माह पहले रामेश्वर उरांव को झारखंड में कांग्रेस को एकजुट करने की जिम्मेवारी मिली है. डॉ अजय कुमार झाविमो से जमशेदपुर के सांसद रहे. फिर पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हुए. उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी मिली. लगभग दो साल तक झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. गुटबाजी के कारण उन्होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया. फिलहाल उन्होंने आप का दामन थाम लिया है. डीजीपी से रिटायर हुए बीडी राम सक्रिय राजनीति में हैं. वर्तमान में वे बीजेपी से सांसद भी हैं. इसी तरह आईपीएस लक्ष्मण सिंह ने राजधनवार से चुनावी अखाडे में उतरे थे, पर सफलता नहीं मिली. वर्तमान में वे भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हैं.
ये आईपीएस साइडलाइन हो गए या मेन स्ट्रीम में नहीं आ पाए
आईपीएस अमिताभ चौधरी ने राजनीति से किनारा कर लिया. वे झाविमो की टिकट पर रांची सीट से लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. आईपीएस अरूण उरांव कांग्रेस में हैं लेकिन उन्हें अब तक एक्सपोजर नहीं मिल पाया है. आईपीएस सुबोध प्रसाद आजसू से जुड़े हुए हैं. इन्हें भी एक्सपोजर नहीं मिल पाया है. फिलहाल ये भी मेन स्ट्रीम में नहीं आ पाए हैं. अब आईपीएस रेजी डुंगडुंग ने वीआरएस लेकर राजनीति में जाने का मन बना लिया है. सूत्रों के अनुसार वे कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं.
सिर्फ एक आईएएस हैं मेन स्ट्रीम में
राजनीति के मेन स्ट्रीम में एक ही आइएएस हैं. पूर्व गृह सचिव ज्योति भ्रमर तुबिद फिलहाल बीजेपी के प्रदेश प्रवत्ता है. पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी. कुछ आईएएस राजनीति में तो आए पर उन्हें एक्सपोजर नहीं मिल सका. बीके चांद लंबे समय तक आजसू से जुड़े रहे. आईएएस डोमन सिंह मुंडा भी आजसू में हैं, पर उन्हें भी एक्सपोजर नहीं मिल पाया. प्रधान सचिव रैंक के अफसर विमल कीर्ति सिंह ने भी वीआरएस लेकर राजनीति में जबरदस्त एंट्री की सोंची थी, लेकिन सफलता हाथ न लगी. मुख्तयार सिंह भी राजनीति के मेन स्ट्रीम में नहीं आ पाए. इसी तरह पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं, लेकिन इनकी राजनीति में अब तक एंट्री नहीं हो पाई है.

