बिहार: कांग्रेस विधान पार्षद प्रेम चंद्र मिश्रा ने बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार पर विधानसभा चुनाव को 6 महीने टालने का आरोप लगाया है. मिश्रा ने कहा कि कोरोना और बाढ़ की विभीषिका में सरकारी तंत्र के पूर्णतः फेल होने से उपजे जनाक्रोश ने सरकार में बैठे दलों को भयभीत कर दिया है.
उन्होंने दावा किया कि बिहार के करोड़ों लोगों को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करने पर सरकारी तंत्र की विफलता ने असुरक्षित और मजबूरी का जीवन जीने को मजबूर कर दिया है. हालात ये है कि अभी चुनाव नियत समय पर हो जाये तो बिहार में भाजपा जदयू की 200 से अधिक सीटों पर हार होगी.
नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी आम जनता के बीच जाने की स्थिति में नही हैं और दोनों दलों के नेता एक ही प्रकार की बयानबाजी का सहारा ले कर लोगों को भ्रमित करने में लगे हैं.
मिश्रा ने कहा कि सच्चाई है कि आजादी के बाद अब तक कि सबसे अलोकप्रिय सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. जिन्हें ऐसा लगता है मीडिया में एकपक्षीय खबरों के आने से सरकार की विफलताएं ढक जाएंगी.
उन्होंने कहा कि जब जनता दुखी और नाराज हो तो अधिकांश समाचार पत्रों में भाजपा-जदयू की सरकार के समर्थन में प्रतिदिन सत्ता पक्ष के दर्जनों नेताओं के एक जैसे बयानों को छापा जाना और विपक्ष की खबरों को ना के बराबर छापना भी सरकार को नहीं बचा पायेगा.
उन्होंने पूछा कि कैबिनेट की बैठक में क्या यह सही नहीं की स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय प्रधान सचिव के बीच कोरोना से निपटने को लेकर मतभेद सामने आए और प्रधान सचिव ने मुख्यमंत्री से कहा कि डॉक्टर अस्पताल जाना नहीं चाहते.
अगर यह सही है तो विपक्ष का आरोप प्रमाणित होता है कि सरकार ने लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है और यह स्थिति कोरोना संक्रमण बढ़ने के लिए पूर्णतः जिम्मेदार है और इसके लिए बतौर मुख्यमंत्री स्वयं नीतीश जी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

