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तकलीफों का सामना कर खुशियां ना पाई तो फिर खुशियों का मजा ही क्या……!

by bnnbharat.com
May 16, 2020
in समाचार
तकलीफों का सामना कर खुशियां ना पाई तो फिर खुशियों का मजा ही क्या……!

तकलीफों का सामना कर खुशियां ना पाई तो फिर खुशियों का मजा ही क्या......!

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नीता शेखर,

“आज तुम बहुत याद आए. जमाने को दिखाने के लिए अपनी परेशानियों को भुलाने के लिए मैंने क्या क्या ना किया”!
“पर ऊपरवाला सोच रहा है दामन में केवल खुशियां ही नहीं देंगे तकलीफों का सामना कर खुशियां ना पाई तो फिर खुशियों का मजा ही क्या”!

आज शारदा मसूरी के होटल में बैठे बैठे सोच रही थी. जिस खुशी को पाना चाहती थी वह खुशी आई भी पर 2 दिन में ही चली गई. शारदा अरविंद कितने खुश थे अपने जीवन में. एक बेटा जो बाहर पढ़ रहा था एक बेटी जो पास में थी सब कुछ अच्छा चल रहा था. तभी एक दिन अरविंद को भयानक सिर दर्द हुआ. काफी कोशिशों के बाद भी ठीक नहीं हो पा रहा था. शारदा ने अरविंद से कहा चलो डॉक्टर के यहां चलते. फिर तो जो डॉक्टर का दौर शुरू हुआ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था. सभी टेस्ट कराने के बाद पता चला ब्रेन ट्यूमर है.

अब तो शारदा के होश उड़ गए. डॉक्टर ने कहा है इन्हें जल्द से जल्द ले कर जाना होगा. इसी बीच अरविंद के दोस्त सुमित ने उन लोगों की काफी मदद की. वह हर कदम पर साथ देने को तैयार रहते थे. जब मुंबई पहुंचे तो डॉक्टर ने कहा 2500000 लगेंगे ऑपरेशन करने का. उस पर भी कोई गारंटी नहीं, की ठीक हो जाए. पर मैं क्या करती यूं ही तो नहीं छोड़ सकती थी मैंने डॉक्टर से ऑपरेशन करने के लिए कह दिया. अस्पताल में भर्ती करके मैं वापस आ गई. फिर जो भी जमा पूंजी उसे लेकर सुमित जी के साथ मुंबई वापस आ गई.

ऑपरेशन तो सफलतापूर्वक हो गया डॉक्टर ने कहा थेरेपी कराने के लिए आपको हर 3 महीने पर आना होगा. इसी बीच बेटे ने भी डिग्री लेकर अमेरिकन कंपनी में नौकरी ज्वाइन कर लिया. बेटी भी बीए फाइनल में आ गई थी. सुमित जी घर आकर हम सबकी मदद किया करते थे. अरविंद दो थेरेपी तक ठीक रहे तीसरा नहीं झेल पाए. हम सभी को रोते बिलखते छोड़ गए थे. इस दुख की घड़ी में भी सुमित जी हमेशा हमारे साथ रहे. बेटा आया भी फिर अपनी नौकरी की वजह से वापस चला गया. अपने दुख तकलीफ को भूल कर फिर से जीने की कोशिश करने लगी.

एक दिन अचानक बेटी को 105 बुखार हो गया और ज्यादा बुखार की वजह से बेटी बेहोश हो गई. मैंने सुमित जी को फोन किया वह दौड़े चले आए. फिर डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने कहा बुखार दिमाग में जाने की वजह से बेटी का दिमाग 2 साल के बच्चे की तरह हो गया है. अब तो जिंदगी की सारी खुशियां ही छीनती जा रही थी पर इस दुख की घड़ी में भी सुमित जी ने साथ नहीं छोड़ा. हर पल साथ खड़े रहे बल्कि सारे नाते रिश्तेदार कन्नी काटने लगे थ.

सुमित जी हमेशा हमको कहते जो अच्छा लगे वही कीजिए और समझाते रहते सुख दुख तो जीवन का हिस्सा है इससे घबराना नहीं चाहिए पर मैं क्या करती मैं भी हिम्मत हारती जा रही थी. बेटी को संभालना मुश्किल लग रहा था. मैंने उसको हॉस्टल में डाल दिया. जब दिमाग थोड़ा फ्री हुआ तो पता चले मोहल्ले वाले सुमित जी को लेकर तरह-तरह की बातें किया करते थे. अब तो मैं और परेशान हो उठी. सुमित जी ने कहा इन सब बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

ऐसे ही जिंदगी चलने लगी थी कि अचानक एक दिन सुमित जी आए और कहने लगे मैं आपसे शादी करना चाहता हूं. उनकी भी पत्नी को गए हुए 15 साल बीत चुके थे. अचानक इन सब चीजों के लिए मैं तैयार नहीं थी. मैंने उनसे कहा इस उम्र में शादी. लोग क्या कहेंगे. आपको जो भी वक्त चाहिए आप ले लीजिए. मैं 2 दिन तक परेशान रही. बेटे को क्या कहूंगी.

तभी सुमित जी आए और कहने लगे आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है मैंने आपके बेटे से बात कर ली है. फिर उन्होंने उसी समय बेटे को फोन लगा दिया. बेटे ने कहा मम्मी शादी कर लो. मैं बहुत खुश हूं. हर इंसान खुशी चाहता है. ऐसे भी तुम अकेले कैसे जिंदगी काटोगी. मैं समझ नहीं पा रही थी. मैं क्या करूं. फिर मैंने भी निर्णय ले लिया शादी करने का. फिर हम ने शादी कर ली. बच्चे भी खुश थे.

आज जिंदगी में इतने दिनों के बाद खुशियां मिली थी. बच्चों ने ही मंसूरी घूमने का टिकट करा दिया था पर मैं तुम्हें कैसे भूल सकती थी. जो हमने साथ गुजारे वह तकलीफ भरी थी पर फिर भी तुम साथ थे. आज मेरी खुशियों में भी तुम साथ हो. फिर से मेरी नई जिंदगी शुरू हो रही है पर हर पल तुम मेरे साथ हो मेरे साथ रहोगे.

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