शिवहर: एक गाना है न ए भाई देख कर चलो, आगे भी नहीं पीछे भी, उपर भी नहीं नीचे भी, दायें भी नही बायें भी. लेकिन यह गाना भी शिवहर में फेल होता दिखता है. यहां हलका भी बुन्दा बान्दी हो जाये तो पानी ही पानी चारों ओर दिखेगा. शिवहर में जितने नाले का निर्माण पानी निकालने के लिए हुआ है. उस नाले से पानी नहीं निकलता बल्कि शहर के पानी ला कर शिवहर को जलमग्न करने में एक अहम भूमिका निभातू है.
1 घंटे के बारिश में शिवहर जिला में जिला गेट के सामने बायें साइड की तरफ नाली में पानी लगने के कारण एक साइकिल सवार व्यक्ति को पता नहीं चला कि पानी कहां है और नाली कहां है. वह उस नाली में गिर पड़ा. गिरने से शरीर में बहुत चोट और खरोच भी आई.
अगर उस स्थान पर नगर पंचायत की तरफ से स्लैब डाला हुआ होता तो ऐसा हादसा ना होता. अगर जिला प्रशासन इसी तरह कान में तेल रख कर सोती रही तो कभी न कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

