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कोरोना का प्रभाव: श्रावणी मेला के आयोजन पर ग्रहण

by bnnbharat.com
June 15, 2020
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कोरोना का प्रभाव: श्रावणी मेला के आयोजन पर ग्रहण

कोरोना का प्रभाव: श्रावणी मेला के आयोजन पर ग्रहण

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दुमका: कोरोना महामारी का प्रभाव विश्वविख्यात श्रावणी मेला पर भी देखने को मिल रहा है. सुप्रसिद्ध जगरनाथपुर रथ मेला के बाद श्रावणी मेले के इस साल लगने की उम्मीद काफी कम है. मेले के आयोजन को लेकर महज कुछ दिन शेष हैं. हालांकि अभी तक इसके आयोजन को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है. इससे यह माना जा रहा है कि इस साल मेला नहीं लगेगा.

केंद्र का दिशा-निर्देश

जानकारी हो कि बीते 30 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन से छूट को लेकर एक गाइडलाइन जारी की थी. अनलॉक-1 के इस गाइडलाइन में फेज-3 के तहत धार्मिक मेले के आयोजन को लेकर जल्द मंत्रालय द्वारा निर्णय लेने की बात कही गई थी. हालांकि एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

आकलन को लेकर मॉकड्रिल कराया

जिला प्रशासन द्वारा मेले के दौरान प्रतिदिन सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) का अनुपालन कराते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण कराने की अधिक संख्या के आकलन के लिए मॉकड्रिल कराया गया था. इसमें देखा गया कि प्रतिदिन लगभग 18 घंटे जलार्पण कराने पर भी अधिकतम लगभग 19200 तीर्थ यात्रियों को जलार्पण कराया जा सकेगा. बाबा बैद्यनाथ धाम और फौजदारी बाबा बासुकीनाथ धाम के मंदिरों को श्रावणी मेले के दौरान लाखों की तादाद में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है.

सुलतानगंज से जल लेते हैं

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में इकट्ठा होने वाले ज्यादातर लोग सबसे पहले सुल्तानगंज जाते हैं. यह बाबाधाम से 105 किमी दूर है. सुल्तानगंज में गंगा उत्तर में बहती है. यहां से भक्त गंगा जल लेकर बाबा धाम की और पैदल आते हैं. वे बाबा बैधनाथ मंदिर तक 109 किलोमीटर की दूरी पर चलते हैं. लोग बोल बम बोलते हुए यहां तक बहुत ही श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं. बाबाधाम तक पहुंचने पर कांवरिया पहले शिवगंगा में खुद को शुद्ध करने के लिए एक डुबकी लगाते हैं. फिर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश करते हैं, जहां ज्योतिर्लिंगम पर गंगा जल अर्पित करते हैं. जुलाई-अगस्त के दौरान यह तीर्थ यात्रा पूरे 30 दिनों के लिए श्रावण के दौरान जारी रहती है.

दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक मेला

यह दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक मेला है. विदेश के लोग भी श्रावण महीने में यहां आते हैं. सुल्तानगंज से बाबाधाम की राह पर नजर रखने वाले लोगों की एक 109 किलो मीटर लंबी लाइन लगती है. अनुमान लगाया जाता है कि एक महीने की इस अवधि में 50 से 55 लाख तीर्थयात्री बाबा धाम जाते हैं.

4 जून को किया था निरीक्षण

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला, 2020 की तैयारी को लेकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रभारी पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी विशाल सागर ने 4 जून को बाबा मंदिर का निरीक्षण किया. इस क्रम में सुरक्षा व्यवस्था, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, विभिन्न मरम्मत कार्य आदि का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव और उसकी रोकथाम के लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. ऐसे में श्रावणी मेला का आयोजन होने या ना होने से संबंधित निर्णय राज्य सरकार और श्राईन बोर्ड द्वारा लिया जायेगा. हालांकि जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर में निर्बाध विद्युत आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न मरम्मत कार्य आदि से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गयी है, ताकि आगामी दिनों में किसी प्रकार की कोई कठिनाई उत्पन्न ना हो. इसके लिए मंदिर परिसर व इसके आस-पास के क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न मरम्मत कार्य कराये जा रहे हैं.

पहली बार नहीं लगेगा जगन्नाथपुर मेला

कोरोना का कहर ऐतिहासिक जगन्नानथपुर मेले पर भी टूटा है. 329 साल के इतिहास में पहली बार मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा. सीमित दायरे में सभी कार्यक्रम विधि विधान से पूरे किये जाएंगे. वर्ष 1691 से लगातार जगन्नाथपुर रथ मेला का आयोजन किया जा रहा है. प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं. मेले से अपनी जरूरत के सामान खरीदते हैं. मेले की भीड़ प्रत्येक वर्ष अपने आप में इतिहास रचती है. हालांकि ऐसा पहली बार होगा, जब लोग इस ऐतिहासिक मेले से वंचित रहेंगे. इस दौरान समस्त कार्यक्रम विधि विधान से पूरे किए जाएंगे. कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का भी ख्याल रखा जाएगा.

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