जगदम्बा प्रसाद शुक्ल,
प्रयागराज: गुरु की महत्ता हमारे जीवन मे सर्वोपरि है क्योंकि गुरु के बिना हम जीवन का सार नहीं समझ सकते हमें सर्वदा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम गुरु के सामने चंचलता न करते हुए आवश्यकता पड़ने पर ही बोलें बाकी समय मे हम उनके उत्तम विचारों को सुने और उसका अनुपालन करें. यह विचार बलापुर में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा के तीसरे दिन चित्रकूट से पधारे स्वामी परीक्षित जी महाराज ने व्यक्त किये.
अपनी कथा में स्वामी परीक्षित महाराज ने कहा कि गुरु चरणों की सेवा का अवसर मिलना परम सौभाग्य की बात है.
समर्पित भाव से गुरु की सेवा व उनके आदेशों का पालन करने से अनुग्रह की प्राप्ति होती है. सत्संग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संतों की संगति करने से जीवन की धारा बदल जाती है. जो इस नश्वर संसार में आया है उसे एक दिन जाना ही होगा. हानि, लाभ, यश, अपयश जीवन के प्रमुख अंग हैं लेकिन सत्संगति से मनुष्य ज्ञान और भक्ति से ओतप्रोत हो जाता है. तीसरे दिन की कथा में यजमान के रूप में डब्बू पाण्डेय ने सपत्नीक आरती पूजन किया. भागवत कथा में प्रमुख रूप से लव कुमार पाण्डेय, अवधेश शुक्ल, कृपा शंकर सहित गांव व आस पास के प्रमुख लोग उपस्थित रहे.

