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दुमका-बेरमो में दोनों तरफ से सज गईं सेनाएं, यूपीए को युवा और भाजपा को पुराने चेहरों पर भरोसा

by bnnbharat.com
October 12, 2020
in समाचार
दुमका-बेरमो में दोनों तरफ से सज गईं सेनाएं,  यूपीए को युवा और भाजपा को पुराने चेहरों पर भरोसा
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चंदन मिश्र (वरिष्ठ पत्रकार),

रांची: झारखंड में उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता लामबंदी में जुट गए हैं. दुमका और बेरमो उपचुनाव के लिए सत्तारुढ़ झामुमो-कांग्रेस और विपक्ष भाजपा की ओर से सियासी सेनाएं सज चुकी हैं. दलों के सेनापति भी खम ठोक कर मैदान में उतर चुके हैं.

चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलु है कि झामुमो-कांग्रेस ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में युवा चेहरों पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने पुराने और अनुभवी चेहरों पर उम्मीद जतायी है. उम्मीदवार चयन करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब नामांकन पत्र भरने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

आज दुमका से झामुमो प्रत्याशी बसंत सोरेन नामांकन पत्र भर रहे हैं. मंगलवार को भाजपा उम्मीदवार लुईस मरांडी नामांकन पत्र भरेंगी. उधर बेरमो में 14 अक्तूबर को भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल करेंगे. कांग्रेस, झामुमो और राजद यूपीए बनकर लड़ेंगे, जबकि भाजपा आजसू के साथ मिलकर संगठित एनडीए बनकर चुनाव लड़ेगी.

दुमका और बेरमो में इस बार रोचक सियासी जंग का नजारा देखने को मिलेगा. इस उपचुनाव में झामुमो, कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के साथ-साथ दलों के नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा साबित होगी. चुनाव में दो युवा नेताओं के सियासी भविष्य का फैसला होना है.

झामुमो के बसंत सोरेन और कांग्रेस के जय मंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह के सामने इस उपचुनाव के बहाने चुनावी राजनीति में खुद को स्थापित करने का एक बड़ा अवसर तो है ही, उनके लिए बड़ी चुनौती भी है. झामुमो-कांग्रेस और राजद की सरकार के दस महीने के कामकाज पर भी जनता मुहर लगाएगी. विधायक हेमंत सोरेन के इस्तीफे से दुमका और कांग्रेस विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह के निधन से बेरमो सीट खाली हुई है.

बसंत और अनूप की नेतृत्व क्षमता परखेगी जनता

दुमका और बेरमो चुनाव में झामुमो और कांग्रेस की नई पौध की नेतृत्व क्षमता को जनता परखने वाली  है. झामुमो के बसंत सोरेन और कांग्रेस के अनूप सिंह पहली बार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. बसंत सोरेन झामुमो के युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं.

झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन के तीसरे सुपुत्र होने के साथ-साथ बसंत सोरेन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई होने का सियासी लाभ मिलने की पूरी संभावना है. उनका सामना भाजपा की अनुभवी नेता लुईस मरांडी से होनेवाला है.

लुईस मरांडी 2019 का चुनाव हार गईं थीं, लेकिन उसके पहले 2014 में उन्हें हेमंत सोरेन को हराने का गौरव हासिल है. दुमका सीट पर मुख्र्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. जीती हुई सीट पर वह चाहेंगे कि अपने भाई की जीत के लिए मार्ग प्रशस्त करें. 

बेरमो में भी दिवंगत कांग्रेस नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह की सियासी बिरासत संभालने वाले कुमार जय मंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह अब तक परदे के पीछे से चुनावी जंग लड़ते रहे हैं. अपने पिता के लिए चुनावी रणनीति तैयार करते थे और चुनाव अभियान में साथ–साथ चलते थे. अब उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतरकर खुद को साबित करना होगा.

पिता से मिली सियासी बिरासत को आगे बढ़ाने का यह बड़ा अवसर है. सफल रहे तो कहानी आगे बढ़ेगी वरना अनूप सिंह के नेतृत्व क्षमता पर दल के अंदर ही सवालिया निशान खड़े हो जाएंगे. अनूप सिंह को अपने परिवार के अंदर और बाहर कई चुनौतियों को स्वीकारते हुए अपने को स्थापित करना है. परिणाम बताएगा कि अनूप सिंह 10 नवंबर के बाद कहां खड़े हैं.

दुमका सीट के उम्मीदवार बसंत सोरेन और लुईस मरांडी आमने-सामने हैं, लेकिन असली चुनावी जंग उम्मीदवारों से कहीं ज्यादा दो बड़े नेताओं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बीच ही होने वाली है. दोनों नेता संथालपरगना की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं. बाबूलाल मरांडी दुमका से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत चुके हैं.

हेमंत सोरेन दुमका से विधानसभा चुनाव लड़कर जीते हुए हैं. अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी हवा बनाने के लिए हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी अपनी-अपनी ताकत झोंक देंगे.

बेरमो सीट कांग्रेस के लिए बहुत अहम है. बेरमो के दिवंगत विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह के प्रति बेरमो की जनता के दिलों में कितनी जगह बरकरार है, उपचुनाव में यह भी साबित हो जाएगा. भाजपा ने यहां से अनुभवी और पुराने चेहरे योगेश्वर महतो को फिर से आजमाने का फैसला लिया है. यह चुनावी लड़ाई अनुभव बनाम युवा के बीच होने वाली है.

योगेश्वर महतो यहां से दो बार चुनाव जीत चुके हैं. पिछले चुनाव में वह कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह से 25 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे, जबकि 2014 के चुनाव में उन्होंने राजेंद्र प्रसाद सिंह को हराया था. यहां कांग्रेस के आला नेताओं की साख भी दांव पर लगी है. सीट किसी तरह कांग्रेस जीते, इसके लिए पार्टी हर जुगत भिड़ाने में लगी है.

भाजपा को दुमका और बेरमो में आजसू का साथ मिलेगा. आजसू की पूरी टीम अपने अध्यक्ष की अगुवाई में उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में खड़ी रहेगी.

झारखंड विधानसभा 2019 के परिणाम

👉 दुमका विधानसभा

– झामुमो- हेमंत सोरेन -81007
– भाजपा- लुईस मरांडी- 67819
– जीत का अंतर – 13188

👉 बेरमो विधानसभा

– कांग्रेस- राजेंद्र प्रसाद सिंह – 89,945
– भाजपा- योगेश्वर महतो- 63,773
– जीत का अंतर- 25,172

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