ब्यूरो चीफ,
रांची: झारखंड में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ लाभुक महिलाओं को सही तरीके से नहीं मिल रहा है. इसके निबंधन में भी महिलाएं दिलचस्पी नहीं लेती हैं. अधिकतर जिलों में योजना को लेकर जागरुकता की भी कमी है.
राज्य की 2.55 लाख महिलाएं हैं जुड़ी
योजना में 2.55 लाख महिलाओं को जोड़ा गया है. इन महिलाओं को मातृत्व लाभ के तहत छह हजार रुपये चार किश्तों में सरकार की तरफ से दी जानी है. योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में जानेवाली गर्भवती माताओं को बच्चे के जन्म देने तक एक वर्ष तक सहायता राशि दी जाती है. केंद्रों में ही लाभुक महिलाओं का निबंधन किया जाता है. नजदीक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से इसकी जांच एएनएम से की जाती है. लाभुकों को उनके आधार नंबर और बैंक खाता के जरिये ही प्रत्यक्ष नगद हस्तांतरण के जरिये किश्तवार सहायता राशि दिये जाने का प्रावधान है.
पहली किश्त के रूप में एक हजार रुपये दिये जाते हैं. चालू वित्तीय वर्ष में लाभुकों के खाते में 30 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जानी थी. मार्च 2019 के बाद से केंद्र से इस योजना की सहायता राशि नहीं दी गयी है. केंद्र से झारखंड को 6.53 करोड़ रुपये मार्च में दिये गये थे. देश भर में महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से 132.34 करोड़ रुपये दिये गये थे. मार्च 2019 के बाद से चालू वित्तीय वर्ष की पहली किश्त झारखंड को नहीं मिली है. समाज कल्याण निदेशक मनोज कुमार के अनुसार प्रक्रियागत विलंब से लाभुकों को राशि नहीं मिल पा रही है.
कैसे और कब-कब मिलती है राशि
योजना में महिला के गर्भवती होने का प्रमाण देने पर पहली किश्त दी जाती है. दूसरी किश्त की राशि गर्भवती माता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वस्थ रहने को लेकर दी जाती है. तीसरी किस्त की राशि बच्चे के जन्म लेने के बाद और चौथी किश्त की राशि बच्चे के टीकाकरण के बाद दी जाती है. इसके लिए लाभुकों का खाता बैंक अथवा डाकघरों से जुड़ा होना जरूरी है.

