खास बातें:-
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निकल चुकी है बीजेपी 65 प्लस के मिशन पर.
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अब आजसू जनाधार बढ़ाने में झोंकी ताकत, एक बूथ 25 यूथ पर हो रहा काम.
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जेएमएम बदलाव यात्रा के जरीए जुटा रहा जनाधार.
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झाविमो ने की थी 6 सीटों पर जीत हासिल.
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नहीं दिख रहीं धरातल पर पार्टी की ठोस गतिविधियां.
कर्मवीर,
रांचीः झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने ही वाला है. अब इसकी उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है. अक्तूबर के अंतिम सप्ताह तक ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ भी लागू हो जाएगा. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल में रेस हो गए हैं. बीजेपी 65 प्लस के मिशन पर निकल चुकी है. आजसू बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन और महिला सम्मान समारोह के जरीए अपने जनाधार को बढ़ाने में जुटा है. सभी स्वयं सहायता ग्रुप को पार्टी की ओर से तीन कुर्सी व दरी उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही एक बूथ 25 यूथ के साथ आजसू युवाओं को साधने में लगा है. इसके पीछे की वजह यह भी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आजसू का वोट प्रतिशत जेएमएम और जेवीएम से काफी कम रहा था. हालांकि आजसू पांच सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन कुल 3.7 फीसदी ही वोट मिले थे. अब आजसू टारगेटेड 26 विधानसभा सीटों पर अपनी ताकत झोंकी है.
जेएमएम बदलाव यात्रा के जरीए जुटा रहा जनाधार
जेएमएम बदलाव यात्रा के जरीए अपना जनाधार जुटा रहा है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन खुद बागडोर संभाले हुए हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी. जेएमएम का वोट प्रतिशत 20.4 फीसदी रहा था. वहीं झाविमो ने छह सीटों पर जीत हासिल की थी. झाविमो का वोट प्रतिशत 10 फीसदी रहा था. झाविमो के लिए अग्नि परीक्षा होने वाली है. उनके घर में जिस तरह से बातें सार्वजनिक हो रही हैं, उनके लिए परेशानी खड़ा कर सकती हैं. हाल ही में विधायक प्रकाश राम को राज्यसभा चुनाव के बाद किनारे कर दिया गया. अब वे बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. संगठन की मुख्य ताकत बाबूलाल मरांडी संगठन को खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं. आठ साल के राजनीतिक सफर में पार्टी को कई कद्दावर नेता हाथ लगे. भाजपा के डॉ दिनेश षाडंगी, झामुमो के दुलाल भुइयां, शिवलाल महतो, गौतम सागर राणा, घुरन राम, प्रकाश राम, जोबा मांझी, चंद्रनाथ भाई पटेल, अनिल मुर्मू ने झाविमो का दामन थामा, लेकिन सभी ने किनारा कर लिया.
कांग्रेस को गुटबाजी से उठना होगा ऊपर
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 10.5 फीसदी वोट मिले थे. बावजूद इसके पार्टी का राज्यस्तरीय आक्रामक तेवर कम दिख रहा है. बड़े कार्यक्रम का आयोजन लंबे समय तक नहीं हो पा रहा है. वहीं पार्टी के अंदर गुटबाजी चरम पर है. संगठन की यह सबसे बड़ी कमजोरी है. लंबे समय से सत्ता से दूर रहने और गुटबाजी का नतीजा है कि धरातल पर पार्टी की ठोस गतिविधियां भी नहीं दिख रहीं. कार्यकर्ता बिखर गये हैं. कई नीचे स्तर के कार्यकर्ता दूसरे दलों के लिए काम करने लगे हैं.
2014 विधानसभा में किस दल का क्या रहा था वोट प्रतिशत
| दल | वोट प्रतिशत |
| बीजेपी | 31.3 |
| आजसू | 3.7 |
| जेवीएम | 10 |
| कांग्रेस | 10.5 |
| जेएमएम | 20.4 |
| बीएसपी | 1.8 |
| सीपीआइएमएल | 1.5 |
| एमसीसी | 1.00 |
| नवजवान संर्घष मोर्चा | 0.5 |

