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हाल राज्य में पदस्थापित हवलदारों का, पद 68 हजार, कार्यरत 53 हजार, कैसे मिलेगी छुट्टी
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रांची जिला में पोस्टेड एक हवलदार की पत्नी ने अवकाश और वेतन नहीं मिलने पर महानिदेशक कार्यालय से मांगी जानकारी
रांची: झारखंड में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस महकमा पुरी तरह मुश्तैदी से कार्यरत है. पर कुल स्वीकृत पद से कम लोगों की नौकरी से खुद पुलिसकर्मियों को ही मुश्किल हालात से गुजरना पड़ रहा है.
राज्य भर में करीब 53 हजार सिपाही और हवलदार अपना कामकाज निबटा रहे हैं. राजधानी रांची के एक थाने में पदस्थापित हवलदार कृष्ण कुमार सिंह का परिवार भी इन दिनों मुश्किल हालात से गुजर रहा है. जिला बल से जुड़े श्री सिंह को पिछले छह माह से न तो पगार मिल रही है और न ही छुट्टी इन्हें दी जा रही है.
इनकी पत्नी गौरी देवी ने थक-हार कर पुलिस के मुखिया से ही जानना चाहा है कि आखिर उनके पति को छुट्टी क्यों नहीं मिल रही है.
उन्होंने सूचना के अधिकार कानून 2005 के तहत यह भी फरियाद की है कि उनके पति ड्यूटी में हैं अथवा नहीं. गौरी देवी के आवेदन पर अब तक पुलिस मुख्यालय ने जवाब भी नहीं दया है.
श्री सिंह की पत्नी के पत्र पर पुलिस विभाग ने खलबली मच जाने के बाद आनन फानन में उक्त हवलदार का कुछ दिनों की छुट्टी स्वीकृति की गई.
उन्होंने अपने आवेदन में क्या उनके पति को गृह विभाग की ओर से बरखास्त कर दया गया है. उन्हें कितने दिनों से अवकाश नहीं दिया जा रहा है.
उन्होंने यह भी पूछा है क रांची जिला बल में कार्यरत उनके पति का किन परिस्थितियों में वेतन बंद कर दिया गया है.
सिपाही अर हवलदार का काफी पद है खाली
पद जानकारी के अनुसार राज्य में सिपाही और हवलदार के 68 हजार पद स्वीकृत हैं. इनमें से 53 हजार ही कायर्रत हैं. शेष पद वर्षों से खाली पड़े हैं. इसकी वजह से हजारों हवलदारों को अवकाश लेने में काफी परेशानी हो रही है.
आये दिन यह सूचना भी मिलती रहती है कि कठिन परिस्थितियों में पुलिसकर्मी सरकार की लापरवाही की वजह से आत्महत्या भी कर रहे हैं. गुस्से में और कई अन्य घटनाओं को अंजाम भी दे दे रहे हैं.
इतना ही नहीं पारिवारिक अमन-चैन, संतोष भी खराब हो रहा है. झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के ए नरेंद्र का कहना है कि राज्य भर में 4500 हवलदार विभिन्न थानों में काम कर रहे हैं. रांची जिला बल के सात सौ हवलदार विभिन्न जगहों पर पोस्टेड हैं, जिन्हें छुट्टी लेने में काफी पापड़ बेलना पड़ता है.

