नई दिल्ली : तिहाड़ जेल का तिलिस्म आज तक किसी की समझ में नहीं आया है. जब से तिहाड़ बनी है तब से अब तक अनगिनत तेज-तर्रार जेल महानिदेशक आकर चले गए. किसी ने तिहाड़ को आश्रम बनाने का ख्वाब देखा तो किसी ने इसे मनुष्य जीवन की सर्वोत्तम पाठशाला बनाने के लंबे-लंबे वायदे किए. अब नये और मौजूदा तिहाड़ जेल महानिदेशक संदीप गोयल जेल में बंद तमाम खूंखार और हाई-प्रोफाइल कैदियों से मोबाइल को दूर करने में जुटे हैं. इन तमाम प्रयासों के बावजूद आलम यह है कि भूले-भटके कहीं न कहीं, कभी न कभी, किसी न किसी कैदी के पास से मोबाइल मिल ही जाता है.
जेल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अब तक मोबाइल कैदियों की बैरक या कोठरी या फिर उनके सामान के अंदर छिपा मिलता था. इस बार एक शातिर कैदी ने जो कमाल किया वो वास्तव में हैरतंगेज है. इस बार मोबाइल न किसी बैरक से मिला और न ही किसी सामान या कोठरी के भीतर छिपाकर रखा गया था. तिहाड़ जेल सूत्रों के मुताबिक, इस बार मोबाइल एक कैदी के पेट से निकलवाकर जब्त किया गया है.
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कैदी के पेट के भीतर से मोबाइल बरामद होने की यह हैरतंगेज घटना तिहाड़ की ही एक जेल की बताई जाती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि तिहाड़ जेल में पहली बार किसी कैदी के पेट के अंदर छिपा मोबाइल बरामद हुआ हो. कुछ समय पहले दिल्ली की एक अन्य जेल में सजा काट रहे कैदी के भी पेट के अंदर छिपा मोबाइल जब्त किया गया था. उस मामले में बात तो यहां तक बाहर निकल कर आ रही थी कि, कैदी के पेट में चार मोबाइल थे. जिनमें से तीन मोबाइल पेट के बाहर निकलवा लिए गए, जबकि पेट के अंदर शेष एक और मोबाइल को बाहर निकालने की कोशिशें बाद में भी लंबे समय तक जारी रहीं. हालांकि जेल के एक सूत्र ने सिर्फ एक मोबाइल बरामद होने की पुष्टि की थी.
लगातार मोबाइल जब्ती के बाद कम से कम यह तो है कि, मोटी रकम खर्च करने के बाद भले ही मोबाइल जेल के अंदर पहुंच रहे हों, मगर इन मोबाइल को जब्त कर लिए जाने से कैदियों की तमाम खतरनाक भावी योजनाओं पर वक्त रहते पानी फेर दिया जा रहा है.

