ज्योत्सना,
खूंटी: प्रधानमंत्री के सपने – किसानों की आय दुगुनी करने को सार्थक कर रहे हैं महिला और पुरुष किसान. जिन इलाकों में सिर्फ धान, मडुवा की खेती की जाती थी. अब वहां के किसान दलहन की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं.
इन इलाकों में टांड़ में अरहर की खेती कामचलाऊ ढंग से बीजों को यहां-वहां छीटकर कर जाती थी, लेकिन प्रदान के सहयोग से तीन-तीन फीट की दूरी पर कतारबद्ध तरीके से की गई. दलहन की खेती ने अचानक किसानों की आय दुगुनी कर दी.
यह इलाका है सिमडेगा जिले का कोचेडेगा लीचीबगान और सेवई गांव. पूर्व में यहां अरहर की खेती कर सिर्फ दस बीस किलो अरहर दाल घर में खाने के लिए किसी प्रकार होता था, लेकिन अब उसी खेत में उतनी ही जमीन पर कतारबद्ध अरहर की खेती से किसान अब तीन चार क्विंटल दलहन फसल की पैदावार आसानी से लेने लगे हैं.
दलहन की फसल को लगाने के बाद अधिक डाली फैलने के लिए ऊपरी हिस्से की तोड़ाई की जाती है. ऐसा करने से दलहन की शाखाएं अधिक फैलती हैं और अधिक डालियां होने से अधिक फल लगते हैं.
सिमडेगा जिले के महिला और पुरूष किसानों ने पहली बार दलहन की फसल से दोगुनी आमदनी की है. कोचेडेगा लीचीबगान की फिलोमीना लकड़ा, सेवई पंचायत की माधुरी लकड़ा और अरुण तिर्की इस बार डेढ़ से दो क्विंटल अरहर दाल की पैदावर से बेहद खुश हैं.
साथ ही अरहर की तीन तीन फीट की दूरी के बीच खाली जगहों में बदाम की खेती की गई. ऐसा कर किसान एक ही खेत से एक ही समय में मिश्रित-फसल का लाभ ले रहे हैं और प्रधानमंत्री के सपने किसानों की आय दुगुनी करने को सार्थक कर रहे हैं.

