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चाइल्ड ट्रैफिकिंग में इजाफा, 6 महीने के आंकड़े हैरान करने वाले

by bnnbharat.com
October 12, 2020
in समाचार
चाइल्ड ट्रैफिकिंग में इजाफा, 6 महीने के आंकड़े हैरान करने वाले
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दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू किया गया लॉकडाउन जहां अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हुआ है, वहीं इस दौरान रोजगार और मेंटल हेल्थ जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं.

इन सबके अलावा लॉकडाउन का एक ऐसा स्याह सच भी सामने आया है जो काफी परेशान करने वाला है. लॉकडाउन के दौरान 6 महीने में चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे बच्चों से जुड़े अन्य अपराधों में इजाफा देखा गया है.

चाइल्ड लाइन यानी बाल सहायता नंबर 1098 के डेटा का अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने विश्लेषण किया है, जिसमें ये चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. ये हेल्पलाइन नंबर पूरे देश में चलता है जो महिला एवं बाल विकाल मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है.

– मार्च और अगस्त के बीच 1098 पर बच्चों से जुड़े करीब 1.92 लाख केस सामने आए. जबकि इन्हीं महीनों के दौरान पिछले साल यानी 2019 में इस तरह के केस की संख्या 1.70 लाख थी.

– लॉकडाउन के इन 6 महीनों में 1098 पर कुल 27 लाख शिकायती कॉल आए. जबकि 2019 में इतने ही समय में 36 लाख फोन कॉल दर्ज किए गए थे. हैरानी की बात ये है कि मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन था, हर कोई अपने घर में कैद था, स्कूल बंद थे, कामकाज की सभी जगह भी बंद थीं, लिहाजा ये उम्मीद की जा रही थी कि बच्चों से जुड़े मामलों में काफी कमी आएगी लेकिन उतना ज्यादा अंतर नहीं देखा गया.

– डेटा से पता चला है कि अप्रैल से अगस्त के बीच बाल विवाह यानी चाइल्ड मैरिज के 10 हजार केस सामने आए. इनमें से ज्यादातर केस में शादी होने से रोक लिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा कि बच्चों से जुड़े 32,700 मामलों में ज्यादातर बाल विवाह, यौन शोषण, भावनात्म शोषण, भीख मांगने और साइबर क्राइम के हैं. अप्रैल और अगस्त के बीच 10 हजार से ज्यादा केस अकेले बाल विवाह के आए, इनमें से ज्यादातर शादियां रुकवा दी गईं. लॉकडाउन की पाबंदियों में ये आंकड़ा काफी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा चाइल्ड लेबर से जुड़े 6800 मामले सामने आए.

बचपन बचाओ आंदोलन ने अपने एक्टिविस्ट की मदद से 24 मार्च से 2 सितंबर के बीच अलग-अलग ट्रेनों से 823 बच्चों को रेस्क्यू किया. इसके अलावा 12 अगस्त से सितंबर के आखिर तक बचपन बचाओ आंदोलन ने ऐसी 78 बसों को पकड़वाया जिनमें गांवों से शहर में करीब 300 बच्चों को तस्कर किया जा रहा था.

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