नई दिल्ली: चीन कोरोना का जन्मदाता, जहां कोरोना दुबारा शुरू हो गया है. जिसकी वजह से वहां वर्षों से डेरा-डंडा जमाए विश्वभर का उद्योग-बाजार सिहर उठा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में रचे-बसे उद्योगपतियों की दुखती ‘नब्ज’ पर हाथ धर चुके हैं. वे समझ चुके हैं कि जिन उद्योग-धंधों की वजह से चीन ने विश्व बाजार में अपना आधिपत्य स्थापित किया है, अगर उनमें से अधिसंख्य भारत में अपनी जड़ें जमा लें तो भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने में समय नहीं लगेगा.
इसी नीति के तहत उन्होंने तमाम मुख्यमंत्रियों से बेहतर औद्योगिक नीति बनाने के साथ नए उद्योग-धंधे स्थापित करने के लिए जमीन की पहचान करने की भी हिदायत दी थी.
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश पर इलेक्ट्रिकल, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, हैवी इंजीनियरिंग, सोलर इक्विपमेंट, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल और टेक्सटाइल के क्षेत्र में काम कर रहे ‘महारथियों’ को चीन, जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया से भारत आने को रिझा रहा है.
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संबंधित देशों के भारतीय दूतावासों को कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी दी गई है.
देशभर में 4 लाख 61 हजार 589 हेक्टेयर भूमि को अब तक नए उद्योग-धंधे स्थापित करने के लिए चिन्हित किया जा चुका है. इसमें से गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश की वो 1 लाख 15 हजार 131 हेक्टेयर वो भूमि भी शामिल हैं जिन्हें इंडस्ट्रीज स्थापित करने के लिए ‘मार्क’ किया गया है.
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नामीगिरामी जमी-जमाई कंपनियों को आमंत्रित करने के लिए उन्हें जमीन के अलावा, बिजली, पानी और सड़क की भी भरपूर व्यवस्था कर ऐसा फार्मूला तैयार किया जा रहा है जिससे वे आकर्षित हो सकें. वैश्विक स्तर पर भारत को उद्योग-धंधे के लिए एक उत्कृष्ट डेस्टिनेशन माना जाए.
चीन से आने वाली कंपनियों के कारण देश में रोजगार के संसाधन तो उपलब्ध होंगे ही, साथ ही जीडीपी भी कुलांचे मारने लगेगी. कोरोना के ग्रहण से अर्थव्यवस्था को निकालना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा. विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस दिशा में बहुत गंभीर और ठोस तैयारी चल रही है.

