दिल्ली: भारत की पहली कोरोना वायरस से लड़ने वाली वैक्सीन कोवाक्सिन वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल बहुत जल्द शुरू होने वाला है. ये वैक्सीन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिडेट के साझा प्रयासों से विकसित की गई है. आईसीएमआर ने उन 12 संस्थानों को पत्र लिख दिया है जहां इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल होना है.
आईसीएमआर ने अपने पत्र में सात जुलाई तक मरीजों को इकट्ठा करने और आंतरिक कमिटी से आवश्यक मंजूरी वेने के निर्देश दिए हैं. इसी के साथ एक चेतावनी भी दी गई है कि निर्देशों का पालन ना करने पर कार्रवाई हो सकती है. भारत बायोटेक उन सात कंपनियों में से एक है जो कोरोना की वैक्सीन के लिए काम कर रही है, ये हैदराबाद में स्थित है.
ये पहली कंपनी है जिसे सरकार की ओर से वैक्सीन के फेज-1 और फेज-2 को रेगुलेट करने की मंजूरी मिली थी. इसके अलावा जायडस काडिला को भी ह्यूमन ट्रायल के लिए ड्रग कंटोलर जनरल की ओर से स्वीकृति मिल गई है. जायडस काडिला ने ZyCov-D नाम की वैक्सीन तैयार की है, जो कोविड-19 या सार्स-कोव 2 वायरस के खिलाफ लड़ने में मदद करेगी.
इन दोनों भारतीयों वैक्सीन के अलावा विश्व में 18 कोरोना की वैक्सीन हैं जो ह्यूमन ट्रायल वाले चरण में हैं. इनमें से सबसे आगे AZD1222 वैक्सीन है जिसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया है. AZD1222 के बाद MRNA-1273 वैक्सीन है जिसे कैसर परमानेंट वाशिंगटन हेल्थ रिसर्च ने विकसित किया है और इसे मॉडर्ना फार्मास्यूटिकल कंपनी बना रही है.
एस्ट्राजेनेका और मॉडर्ना फार्मास्यूटिकल पहले ही कोविड-19 वैक्सीन बनाने के लिए भारतीय कंपनियों के साथ करार कर चुकी हैं.

