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भारत की आत्मनिर्भरता गांव के स्वावलंबी होने से गुजरती है -अशोक भगत

by bnnbharat.com
August 18, 2020
in Uncategorized
भारत की आत्मनिर्भरता गांव के स्वावलंबी होने से गुजरती है -अशोक भगत
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रांची: कोरोना महामारी संक्रमण के काल में जहां देश विभिन्न चुनौतियों से सफलतापूर्वक जूझ रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का मंत्र देकर, हमारे आत्मविश्वास को जगाने का काम किया है. भारत गांधी और विनोबा भावे का देश है, और जैसा कि ये महान चिंतक कहते थे, भारत गांवों का देश है. इसलिए हमारे देश की आत्मनिर्भरता इस देश के गांव के स्वावलंबी होने से गुजरती है. हमें ग्रामीण उद्योगों और कृषि में उद्योग स्थापित करने की दिशा में बढ़ना होगा. गांव में मिट्टी की भी कीमत है, स्वावलंबन की ओर प्रधानमंत्री ने सबका ध्यान आकर्षित किया.
उक्त बातें पत्र सूचना कार्यालय, रांची, रीजनल आउटरीच ब्यूरो, रांची और फील्ड आउटरीच ब्यूरो, गुमला के संयुक्त तत्वाधान में “आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत“ विषय पर आयोजित वेबिनार में पद्मश्री श्री अशोक भगत, सचिव विकास भारती, गुमला, ने कही.

वेबीनार को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए भगत ने कहा कि अंग्रेज भारत आए थे तो उन्होंने सबसे पहले हमारे गांव की स्वावलंबी अर्थव्यवस्था को नष्ट करने का काम किया. हमारे हस्तशिल्प और हस्तकला को खत्म कर दिया और उसकी बदौलत औद्योगीकरण का रास्ता दिया जिससे हम परतंत्रता की तरफ बढ़ने लगे. गांव आज भी लोगों को आश्रय दे सकता है. हमने देखा कि कोरोना के कारण शहरों में कैसे मजदूरों की दुर्दशा हुई और वे गांव को लौटे जहां उन्हें आश्रय मिला. अगर हम गांव में कुटीर उद्योग स्थापित करें जो हमारी पारंपरिक आयुर्वेद और कृषि आधारित परंपरा है, उसमें वैल्यू एडिशन लाएं तो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस प्रयास होगा.

आदिवासी महिलाओं ने स्वावलम्बन की ओर काम किया. हमेशा यह बात ध्यान रखना है कि छोटे-छोटे घास से भी पैसे आ सकते हैं. हम अपने आसपास के पेड़ पौधों को भी दवाई के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं. यहां की महिलाओं में जो सखी मंडल की स्थापना हुई वह उनके काम आई. हमारे देश में हर ब्लाक में 1-1 बाबा रामदेव खड़े हो सकते हैं, और काफी कम लागत में हम अपने गांव में कृषि आधारित उद्योग लगा सकते हैं. गांव के नौजवान जब अपने बल पर खड़े होंगे जब वो स्वावलंबी उद्योगों से जुड़ेंगे.

वेबिनार के अध्यक्ष पीआईबी एवं आरओबी रांची के अपर महानिदेशक अरिमर्दन सिंह ने सरकार की तरफ से सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर होना हमेशा अच्छा होता है. कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट की स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री द्वारा संकट को अवसर में बदलने का मंत्र देते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गई. इसके तहत बुनियादी ढांचे, टेक्नोलॉजी, उद्योगों तथा कृषि एवं रोजगार सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की गई जिससे देश के विकास एवं आर्थिक प्रगति को नई दिशा दी जा सके. सरकार के प्रयासों से आने वाले समय में निश्चित रूप से इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे.

विशिष्ट अतिथि सांसद रांची लोकसभा, संजय सेठ ने कहा कि आत्म निर्भर भारत का प्रधानमंत्री का उद्घोष, गांधीजी द्वारा सौ साल पहले कही गई बात कि भारत गांवों में बसता है, उसी की अगली कड़ी है. गांवों को मजबूत करना, सुबों को मजबूत करना, इससे देश मजबूत होगा, प्रधानमंत्री इसी सोच को आगे बढ़ा रहे हैं. हालांकि कोरोना काल में कई बुराइयां है लेकिन इस दौर में कुछ अच्छाइयां भी प्रकट हुई है. हमने देखा कि पिछले तीन चार दशक से जारी शहर की ओर भाग दौड़ इस महामारी के चलते रुक गया और एक उल्टा चक्र चला इसमें लोग वापस गांव की तरफ आते दिखाई दिए. हम देख रहे हैं कि ऐसे कई युवा जो पहले शायद किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम या विदेश जाना चाहते थे, वह अब खेती की तरफ अग्रसर हो रहे हैं कृषि से जुड़े उद्योगों में रुचि दिखा रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोरोनावायरस अभिशाप को हमें वरदान में बदलना है. हमें यह सोचना होगा कि भारत अपने कृषि प्रधान देश के तमगे को कैसे चरितार्थ करे. अगर हम झारखंड में देखें तो यहां पर वोकल4लोकल एक अहम नारा है.जिन लकड़ियों में दीमक लग जाता है उन्हें हम फेंक देते हैं लेकिन डुमरी के रहने वाले सुमित कश्यप ऐसी लकड़ियों से मूर्ति बनाना शुरू किए. ऐसे लोगों के लिए हमें बाजार उपलब्ध कराना होगा.

आत्मनिर्भर यानी अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाना होता है. आत्मनिर्भर का मतलब स्वाभिमान को जगाना है जिससे हम स्वावलम्बी बन सकते हैं. अगर हम देखें तो पहले के भारतीय गांव आत्मनिर्भर हुआ करते थे उस गांव में सब्जी उत्पादनकर्ता, कपड़े वाले, ढोल मंजीरे बनाने वाले, औजार बनाने वाले हर वर्ग के लोग और कार्यकर निवास करते थे. बाजारीकरण के चलते ऐसे बहुत सारे लोग शहरों की तरफ पलायन कर गए और एक आत्मनिर्भर भारत का गांव बिखर गया है हम कैसे दोबारा अपने गांव को सशक्त बनाएं इस पर हमें सोचना होगा.

जब कोरोनावायरस से लोग शुरुआत में संक्रमित होने लगे तब सैनिटाइजर महंगा मिलता था और अब लोकल स्तर पर भी सैनिटाइजर का उत्पादन किया जाने लगा जिससे काफी कम मूल्य पर सैनिटाइजर उपलब्ध है, यह भारत की विशेषता है. भारत मिसाइल तैयार कर रहा है, इसके लिए मैं भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी को सैल्यूट करता हूं. अंतरिक्ष, संचार, तकनीकी, कृषि, स्टार्टअप और निर्माण जैसे क्षेत्रों में हम काफी आगे जा रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री युवाओं के आत्मनिर्भर बनने में एक प्रणेता की भूमिका निभा रहे हैं. अगर लालफीताशाही स्थानीय स्तर पर चलती रही तो लघु उद्योग बंद होते रहेंगे. धरातल पर उतर के हमें आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में काम करना होगा.

विशिष्ट वक्ता समीर ओरांव, सांसद राज्यसभा, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वदेशी की तुलना में आत्मनिर्भर भारत एक ज्यादा उपयुक्त मुहिम है. इसमें न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व की प्रगति समाहित है. हम विश्व की उत्कृष्ट कंपनियों को भारत आकर निर्माण करने का न्योता दे रहे हैं, इससे भारत के उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा और वहीं भारत जैसा बड़ा बाजार इन उत्पादकों को मिलेगा.
अगर हम झारखंड में देखे तो यहां पर घरेलू उत्पाद, वन उत्पाद से जुड़े लघु उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं. अगर इसे रचनात्मक तरीके से प्रोत्साहित किया जाए तो यहां के युवक और युवतियां अपनी मेहनत और लगन से वोकल4लोकल के अभियान को सार्थक करेंगे. साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था भी और सशक्त होगी.

हम देखते हैं कि हमारे राज्य का हुनर दूसरे प्रदेशों में कार्य करने चला जाता है. अगर वह यहां पर आना भी चाहते हैं तो उन्हें यहां उचित रोजगार नहीं मिल पाता, और वो निराश होकर अक्सर वापस चले जाते हैं. इसलिए हमें आत्म निर्भरता की ओर तेजी से कार्य करना होगा. यहां के युवाओं में हुनर और कार्य करने का उत्साह है, जरूरत है इन्हें सही दिशा निर्देश देने का. सांस्कृतिक दल झारखंड संस्कार दीप की सीमा देवी ने “आत्मनिर्भर भारत“ पर एक सुंदर गीत की प्रस्तुति की.

वेबीनार में पी आई बी, आर ओ बी, एफ ओ बी के अधिकारी- कर्मचारियों के अलावा दूसरे राज्यों के अधिकारी कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया. आत्मनिर्भर भारत से जुड़े एनजीओ, गीत एवं नाटक विभाग के अंतर्गत कलाकारों एवं सदस्यों, आकाशवाणी के पीटीसी, दूरदर्शन के स्ट्रिंगर तथा मीडिया से संपादक और पत्रकार भी शामिल हुए. वेबिनार का समन्वय व संचालन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी महविश रहमान ने किया, विकास भारती के पंकज सिंह और क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी गौरव कुमार पुष्कर ने समन्वय में योगदान दिया, धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी ओंकार नाथ पाण्डे ने किया.

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