नई दिल्ली: सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारत स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों से भविष्य की लड़ाई जीतेगा. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए रावत ने कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपने समर्पण और प्रतिबद्धताओं को जारी रखना चाहिए.
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ रावत ने शुक्रवार को डीआरडीओ के पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि भविष्य में होने वाले युद्ध हम स्वदेशी हथियारों के माध्यम से जीतेंगे. मौजूदा समय में हमारा देश उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसके बावजूद जिस तरह से हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण है. जनरल रावत ने यह भी कहा कि सरकार ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों की खरीद के लिए निर्णय ले रही है. उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि इस बार हम देख रहे हैं कि हमारा निजी उद्योग भी प्रेरित है, उन्हें आपके समर्थन की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने एक दिन पहले ही 28 हजार करोड़ रुपये के उपकरण खरीदने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है. उनमें से 90 प्रतिशत हथियार और उपकरण भारत में बनाए जाएंगे. डीआरडीओ का इन सभी में महत्वपूर्ण योगदान होगा. जनरल रावत ने कहा कि मंजूर किये गए प्रस्तावों में भारतीय वायु सेना के लिए डीआरडीओ द्वारा डिजाइन और विकसित एयरबोर्न प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली, भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती जहाजों और भारतीय सेना के लिए मॉड्यूलर पुलों की खरीद शामिल है.

