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अनौपचारिक कामकाजी महिलाओं को मिले विशेष सुविधा – फोर्सेज

by bnnbharat.com
November 12, 2019
in समाचार
अनौपचारिक कामकाजी महिलाओं को मिले विशेष सुविधा – फोर्सेज

अनौपचारिक कामकाजी महिलाओं को मिले विशेष सुविधा - फोर्सेज

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राहुल मेहता,

रांची: महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण देश की उन्नति का द्वार है. यह सरकार की प्राथमिकता भी है. परन्तु निरंतर प्रयास के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहें हैं. इसका एक प्रमुख कारण है महिला का घर एवं बच्चे के साथ जुड़ा होना. आज, 94% महिलायें अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं. परिवार चलाने के लिए उन्हें कम भुगतान वाले काम करने पड़ते हैं. देश में लगभग एक तिहाई महिलायें परिवार अकेले चला रही हैं. लेकिन विडंबना यह है कि इनका योगदान अदृश्य एवं उपेक्षित है.

विभिन्न अध्ययनों का निष्कर्ष-

  • यदि महिलाओं के पास पूरे समय के लिए बाल देखभाल सुविधा हो तो उनकी आय में 50% से अधिक की वृद्धि संभव है.
  • इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 27% तक वृद्धि संभव है.
  • अनौपचारिक अर्थव्यस्था का जीडीपी में 50% से अधिक योगदान है, बावजूद इसके, इस क्षेत्र के कामगारों के लिए न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा सुविधा उपलब्ध नहीं है.
  • सुरक्षा, संयुक्त परिवार की संख्या में कमी, आवागमन सम्बन्धी मुद्दों के साथ परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं के आर्थिक गतिविधियों में बाधा है.
  • बाल-सेवा के अनुपस्थिति का दुष्प्रभाव महिलाओं के आर्थिक स्थिति, स्वास्थय के साथ-साथ घर की बड़ी लड़कियों के शिक्षा पर भी पड़ता है.

महिलाओं का अर्थव्यवस्था और समाज में योगदान बढ़ाने के लिए झारखण्ड फोर्सेस (फोरम फॉर क्रेचेस एंड चाइल्ड केयर सर्विसेज) ने राजनीतिक दलों से निम्नलिखित सुझावों को समाहित करने की मांग की है-

  1. सार्वजनिक बाल-सेवा की सुविधा को सभी श्रमिकों के अधिकार के रूप में मान्यता.
  2. आंगनवाड़ी केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण क्रेचेस (पालनाघर) एवं डे-केयर सेंटर के रूप में विकसित करना जिसमें छह साल तक के बच्चों को व्यापक व समग्र गुणवत्तायुक्त प्रारंभिक बाल देख रेख की सेवा मिले.
  3. पालनाघर का स्थापना कार्यस्थल के पास हो. इसका सेवा काल उस क्षेत्रविशेष के अधिकतर महिलाओं के कार्य के समयानुसार हो. (जैसे- सफाई कर्मियों को सेवा की जरुरत प्रातः काल से ही होती है).
  4. अनौपचारिक क्षेत्र काम कर रही सभी महिला श्रमिकों का मातृत्व अधिकार सुनिश्चित हो, जैसे कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में है.
  5. पुनर्गठित समेकित बाल विकास सेवा के प्रावधानों का सख्ती से पालन हो.
  6. बाल सेवा (चाइल्ड केयर) को पेशेवर कार्य माना जाये. तदनुरूप सेवा प्रदाताओं को न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, बीमा, प्रशिक्षण आदि मिले.

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