मुंबईः मुंबई की पांच महीने की तीरा कामत एक दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्क्युलर एथ्रॉपी (SMA) से जूझ रही है. इसके इलाज में 22 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगना है. एसएमए एक दुर्लभ जैनेटिक कंडीशन है, जिसके चलते मसल्स का नुकसान होता है. यह मांसपेशियां चलने-फिरने के लिए जरूरी होती हैं.
डॉक्टरों के मुताबिक तीरा के शरीर में वह जीन मौजूद नहीं है, जो प्रोटीन बनाने के काम आती है और जिसकी वजह से मांसपेशियां और तंत्रिकाएं जीवित रहती हैं. और इसका नतीजा यह हुआ है कि तीरा के शरीर की तंत्रिकाएं काम करना बंद होने लगी थीं. इतना ही नहीं दिमाग की मांसपेशियां भी निर्जीव होती जा रही थीं, जिससे तीरा को सांस लेने में परेशानी हो रही थी. इसके बाद तीरा को मुंबई के अस्पताल में 13 जनवरी को भर्ती कराया गया था, लेकिन इसके बाद भी उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं दिखा और धीरे-धीरे इस बीमारी की वदह से एक फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया.
इस बीमारी के इलाज के लिए तीरा को Zolgensma इंजेक्शन लगना है, जिसे स्विटजरलैंड की कम्पनी नोवार्टिस तैयार करती है. कंपनी के मुताबिक यह इंजेक्शन जीन थैरेपी ट्रीटमेंट की तरह काम करता है, जिसे एक बार ही लगाया जा सकता है. एसएमए की परेशानी से जूझने वाले 2 साल से कम उम्र के बच्चों को लगाया जाता है. इंजेक्शन की कीमत को लेकर सभी में कौतुहल है कि आखिर यह इतना महंगा क्यों है? इसे लेकर कंपनी के सीईओ नरसिम्हन का कहना है कि जीन थैरेपी मेडिकल जगत में एक बड़ी खोज है. उन्होंने कहा कि इस इंजेक्शन के तीसरे चरण का परीक्षण किए जाने के बाद इंस्टिट्यूट फॉर क्लीनिकल एंड इकोनॉमिक ने इसकी कीमत 9 से 15 करोड़ रुपए के बीच तय की थी. फिर कंपनी नोवार्टिस ने इसी को देखते हुए इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपए रखी.

