BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

30 साल की सेवा के बाद आखिरी सफर पर निकला INS विराट

by bnnbharat.com
September 19, 2020
in समाचार
30 साल की सेवा के बाद आखिरी सफर पर निकला INS विराट
Share on FacebookShare on Twitter

नई दिल्ली: भारत में सबसे लंबे समय तक सर्विस देने वाला युद्धपोत आईएनएस विराट (INS Viraat) अब अपने आखिरी सफर पर निकाल चुका है. तीस साल तक सेवा देने के बाद साल 2017 में युद्धपोत को डिकमिशंड (सेवानिवृत्त) कर दिया गया था.

शनिवार को यह मुंबई से गुजरात के अलग स्थित जहाज तोड़ने वाले यार्ड के लिए रवाना हो गया. भारतीय नौसेना का यह युद्धपोत रविवार देर रात भावनगर पहुंचेगा.

नौसेना में विराट को ‘ग्रांड ओल्ड लेडी’ (Grand Old Lady) भी कहा जाता है. आईएनएस विराट का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है. ये दुनिया का एकलौता ऐसा जहाज है जो इतना बूढ़ा होने के बाद भी इस्तेमाल किया जा रहा था और बेहतर हालत में था.

सन् 1987 में नौसेना में शामिल हुई इस वॉर शिप को नीलामी में श्रीराम ग्रुप ने 38.54 करोड़ रुपए में एक नीलामी में पिछले महीने खरीदा था. अब इसके लोहे का उपयोग मोटरबाइक्स बनाने के लिए किया जा सकता है. नीलामी में इस विमान वाहक को खरीदने वाली कंपनी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी है.

श्रीराम ग्रुप ने कहा कि उसने इस विशाल विमान वाहक को नीलामी में खरीद लिया और इसे पूरी तरह तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने में एक साल का वक्त लगेगा. श्रीराम ग्रुप के पास एशिया का सबसे बड़ा स्क्रैपयार्ड है, जो गुजरात के अलंग में स्थित है.

लहरों के सिकंदर के नाम से मशहूर आईएनएस विराट भारत का दूसरा विमान वाहक पोत है, जिसने भारतीय नौसेना में 30 वर्ष तक सेवा दी है. इससे पहले उसने ब्रिटेन के रॉयल नेवी में 25 वर्षों तक सेवा दी. इसका ध्येय वाक्य ‘जलमेव यस्य, बलमेव तस्य’ था. जिसका मतलब होता है, ‘जिसका समंदर पर कब्जा है वही सबसे बलवान है.’

इस सूक्ति को सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनाया था जिन्होंने 17वीं शताब्दी में इसे अपनी सेना के लिए इस मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया था.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

चीन ने दी अमेरिका को धमकी, एप पर बैन का जल्द देंगे जवाब

Next Post

31661 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी करें: सीएम योगी

Next Post
नॉन काेविड अस्पतालों में जल्द शुरू हो इमरजेंसी सेवायें: योगी

31661 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी करें: सीएम योगी

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d