राज्य सरकार की जनकल्याकारी योजनाओं का लाभ जिलेवासियों को सुलभता से मिले इस दिशा में पूर्वी सिंहभूम, जिला प्रशासन उपायुक्त सूरज कुमार एवं उप विकास आयुक्त परमेश्वर भगत के नेतृत्व में सजगता से प्रयासरत है . आवास, मनरेगा, पेंशन, कृषि या अन्य कई योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को दिलाने की दिशा में पदाधिकारी प्रयासरत रहते हैं ताकि विकास की सही अवधारणा धरातल पर दिखे तथा जिले का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके . इस कड़ी में मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत परुलिया व गोहला ग्राम में वर्ष 2020-21 में सफलतापूर्वक क्रियान्वित तीन योजनाओं तथा उससे ग्रामीणों को होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी जा रही है .परुलिया ग्राम के सूर्याबेड़ा टोला में राजू मुर्मु के जमीन पर 30 ग् 30 ग् 10 डोभा निर्माण पथरीली जमीन को काट कर मनरेगा से किया गया है . लाभुक एवं ग्रामीणों के द्वारा डोभा के पानी का खेती, मछली पालन एवम दैनिक कार्यो जैसे पशु को नहलाने आदि के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है . लाभुक राजू मुर्मु बताते हैं कि पथरीली जमीन होने के कारण यह बेकार पड़ी थी जिसमें जिला प्रशासन द्वारा डोभा का निर्माण करा देने से काफी सहूलियत मुझे तथा अन्य ग्रामीणों को भी हो रही है . वे बताते हैं कि खेती-किसानी में उपयोग के अलावा गर्मी के दिनों में पशुओं को नहलाना हो या कपड़े धोना हो, इन सभी दैनिक कार्यों में डोभा के पानी का उपयोग किया जाता है . गोहला ग्राम में विश्वनाथ पाल के 1 एकड़ जमीन पर मिश्रित बागवानी के तहत 152 फलदार पौधे और 40 इमारती पौधे लगाए गए हैं . साथ ही लाभुक द्वारा बागवानी के अंदर की जमीन पर बैगन, भिंडी, गोभी की खेती भी किया जा रहा है जो इनके लिए अतिरिक्त आय का साधन है . सब्जी की खेती से पहले वर्ष से ही लाभुक को आमदनी होने लगी है . विश्वनाथ पाल बताते हैं कि मिश्रित बागवानी का फायदा यह है कि जमीन का कोई भी हिस्सा आपका बेकार नहीं होता, पौधारोपण के बाद जो जगह बचता है उसमें आसानी से सब्जी का उत्पादन किया जा सकता है जो आय का एक स्रोत भी बन जाता है ’कैच द रेन’ के तर्ज पर पहाड़ के पानी की गति को कम करते हुए उसे एकत्रित कर उपयोग में लाने के उद्देश्य से परुलिया ग्राम के सूर्याबेड़ा टोला में वीरा हेम्ब्रम के जमीन पर नाला में लूज़ बोल्डर चेक डेम का निर्माण किया गया है . वीरा हेम्ब्रम बताते हैं कि पहले पहाड़ का पानी नीचे बह जाता था जिससे सारा पानी बेकार चला जाता . ऐसे में चेक डैम निर्माण का सुझाव मिलने पर उन्होने खुशी-खुशी इसे जिला प्रशासन के पूर्ण सहयोग से पूरा कराया . वे बताते हैं कि इससे पशुओं को पानी पीने में सहूलियत होने के साथ-साथ आसपास के खेतों में सिंचाई कार्य में भी उपयोग किया जाता है .

