अशोकनगर: राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मलेरिया एवं डेंगू के नियंत्रण एवं उपचार के संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई.
कार्यशाला में डिप्टी कलेक्टर बी.बी.श्रीवास्तव, सिविल सर्जन डॉ.हिमांशु शर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे. कार्यशाला में वर्षा ऋतु के दौरान जिले में मलेरिया एवं डेंगू को फैलने से रोकने के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, नगरीय निकाय, जल संसाधन, आदिम जाति कल्याण विभाग, पीडब्ल्यूडी तथा महिला बाल विकास के अधिकारियों को डेंगू, मलेरिया नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा.
उन्होंने डेंगू तथा मलेरिया नियंत्रण हेतु पानी का जमाव नहीं होने देने के लिए सभी ऐसे स्थलों में पानी की निकासी एवं कीटनाशक दवा का छिड़काव करने के निर्देश दिए.
ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में डेंगू तथा मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश देते हुए कहा कि घर के आसपास साफ-सफाई रखने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए ताकि मच्छर उत्पन्न न हो. उन्होंने सभी चिकित्सालयों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
कार्यशाला में सीएमएचओ डॉ जे.आर. त्रिवेदिया तथा जिला मलेरिया अधिकारी ने मलेरिया एवं डेंगू से बचाव तथा उपचार के संबंध में विस्तार से जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि घरों में रखे कूलर में खस पेड या जाली न बदले जाने, गमलों, पुराने टायर, फूलदान आदि में पानी के जमाव से डेंगू के लार्वा को पनपने का मौका मिलता है.
बिना ढ़क्कन वाली पानी की टंकियां भी इसका कारण बन जाती हैं. डेंगू स्वच्छ पानी में मच्छरों के कारण फैलता है. कार्यशाला में संबंधित विभागों के अधिकारी, चिकित्सक भी उपस्थित थे.
डेंगू तथा मलेरिया के लक्षण तथा बचाव
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार होना, मासंपेशियां तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता है, जी मचलना एवं उल्टी होना तथा गंभीर मामलों में नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना अथवा त्वचा पर चकते उभरना डेंगू के लक्षण होते हैं.
इसी प्रकार सर्दी व कंपन के साथ बुखार, उल्टियां, सिरदर्द, पसीना आकर बुखार उतरना, बुखार उतरने के बाद थकावट व कमजोरी होना मलेरिया के लक्षण हैं.
बुखार आने पर तुरंत रक्त की जांच कराना चाहिए. जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर पूरा उपचार लेना चाहिए. मलेरिया के लिए खून की जांच व उपचार सुविधा सभी शासकीय चिकित्सालयों पर निःशुल्क उपलब्ध है.
मलेरिया एवं डेंगू नियंत्रण के उपाय
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि मलेरिया से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदारी का उपयोग करना चाहिए. घर के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें और टीमोफाफस, मिट्टी का तेल या जला हुआ इंजन ऑयल डालना चाहिए. घर एवं आसपास अनुपयोगी सामग्री में पानी जमा नहीं होने दें और सप्ताह में एक बार कूलर, बाल्टियों में एकत्रित पानी खाली कर दें.
पानी के पानी को ढककर रखना चाहिए और हैण्डपम्प के पास पानी एकत्रित नहीं होने देना चाहिए. मच्छरों एवं उनके लार्वा को नष्ट करने के लिए घरों में पायरेथ्रम का छिड़काव, पानी भरे हुए बर्तनों में जल संग्रहित स्थानों में टेमोफास का छिड़काव किया जाता है.
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि मलेरिया पेरासाईड को मनुष्य के शरीर में नष्ट करने के लिए मलेरिया की औषधियां तुरंत प्रारंभ की जाती हैं जिससे प्लास्मोडियम की मच्छर के शरीर में जाने वाली अवस्था गेमिटोसाइट मनुष्य के रक्त में नहीं बन पाती है.
इसके अलावा मच्छरों एवं उनके लार्वा को नष्ट करने के लिए घरों में पायरेथ्रम का छिड़काव कर, पानी भरे हुए बर्तनों में, जल संग्रहित स्थानों में टेमोफास का छिड़काव किया जाता है. तालाबों, पोखरों, कुओं, बाबड़ी में लार्वाभक्षी गम्बूसिया मछलियां डाली जाती हैं.

