नई दिल्ली : पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को आरोप लगाया कि आईएनएक्स मीडिया मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और जांच एजेंसी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है. चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपने आवेदनों में कहा, “इस मामले में तत्काल आपराधिक कार्रवाई एक दुर्भावनापूर्ण मामला है, जोकि राजनीतिक प्रतिशोध से पैदा हुआ है. जांच एजेंसी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है, जो कि याचिकाकर्ता की बेदाग छवि को धूमिल करना चाहती है.”
चिदंबरम ने हाईकोर्ट के समक्ष दो आवेदन पेश किए, जिनमें से एक जमानत के लिए था. इसके अलावा दूसरा आवेदन पांच सितंबर को निचली अदालत द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. चिदंबरम ने अपनी दलीलों में आगे कहा कि वह सरकार के राजनीतिक विरोधी हैं और यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री को पिछले गुरुवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय कुमार कुहर ने चिदंबरम को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अदालत ने चिदंबरम द्वारा दायर किए गए आवेदनों को भी स्वीकार कर लिया था. इनमें जेड-श्रेणी की सुरक्षा के साथ एक खाट, बाथरूम के साथ एक अलग सेल और दवाओं की अनुमति मांगी गई थी. उन्होंने जेल में पश्चिमी शैली के शौचालय (इंग्लिश टॉयलेट) की भी मांग की थी.
चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में समर्पण करने की अनुमति के लिए अदालत में एक और आवेदन दिया था. अदालत ने वित्तीय निगरानी एजेंसी को नोटिस जारी किया था और इस पर सुनवाई 12 सितंबर को होगी.
इस दौरान चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कई दलीलें पेश की. उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों पर दबाव बनाने जैसी संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया. इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “जहां तक ईडी मामले का संबंध है, सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना को स्वीकार किया है. सबूतों के साथ छेड़छाड़ की एक मजबूत संभावना है.”

