ब्यूरो चीफ
रांची
राजधानी रांची के रातू अंचल में फर्जी तरीके से जमीन बेचे जाने के मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारी अमर प्रसाद के खिलाफ जांच शुरू हो गयी है. अंचल अधिकारी ने गलत दस्तावेज और पंजी-2 में हेरफेर कर बुढ़मू के गिंजो ठाकुर गांव के रहनेवाले लालमन साहू की रैयती जमीन को बेचते हुए जमाबंदी कर दी थी.
लालमन साहू के परिजनों की रातू अंचल के मुरचू में 545 एकड़ से अधिक जमीन है. इसमें से आधी जमीन अंचल अधिकारी ने मनोज सिंह, अरविंद सिंह, त्रिभुवन तिवारी और अनिल तिवारी के साथ मिल कर बेच दी. कई बार आवेदन देने के बाद भी लालमन साहू का पंजी-2 में नाम नहीं चढ़ाया गया और न ही जमाबंदी की गयी. एक लाख रुपये प्रति डिसमील की लागत से 150 से 200 एकड़ जमीन फर्जी वाड़ा करके बेच दी गयी. इसमें एक अरब से अधिक राशि का लेन-देन करने की सूचना है.
जानकारी के अनुसार पीड़ित परिवार के लोगों ने रातू अंचल के अंचल अधिकारी से कई बार रजिस्टर-2 में नाम चढ़ाने और लगान रसीद निर्गत करने की गुजारिश की. पर इनके आवेदन पर विचार ही नहीं किया गया. मार्च 2019 में अमर प्रसाद ने अपना तबादला देवघर सदर अंचल करा लिया. इसके बाद फिर अगस्त 2019 में इनका तबादला धनबाद में कर दिया गया. सूत्रों का कहना है कि जांच की वजह से ही इनका तबादला किया गया है. विभाग के संयुक्त सचिव रामकुमार सिन्हा जांच की बात को एक सिरे से झुठला रहे हैं. वैसे भी अंचल के वर्तमान सीओ भी अपने स्तर से जांच करा रहे हैं.
मझिअस, बेटखेता, गैरमजरुआ मालिक जमीन की जमाबंदी कर दी गयी अंचल कार्यालय से
अंचल कार्यालय से लालमन साहू की मझिअस, बेटखेता और गैरमजरूआ मालिक (जमीन के प्रकार) जमीन की दूसरों के नाम से जमाबंदी कर हेराफेरी की गयी है. इसमें रजिस्टर-2 और खेवट में दर्ज लालमन साहू के नाम की जगह दूसरे लोगों का नाम चढ़ा कर जमीन की खरीद-बिक्री करने की इजाजत दे दी गयी. पूरे प्रकरण में रांची के भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध बतायी जाती है, क्योंकि जमीन की जमाबंदी करने की अनुशंसा यहीं से दी गयी है. अंचल कार्यालय के कर्मियों, अधिकारियों ने खेवट संख्या-3, 4, 5 की जमीन में ही अधिकतर गड़बड़ियां की हैं. इस खेवट में खाता संख्या 94, 18, 68, 47, 48, 93, 19 और अन्य शामिल हैं.

