खास बातें:
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जिले में डीसी पद का कोई मतलब ही नहीं
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प्रभारी डीजीपी की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश का है उल्लंघन
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डीसी और एसपी हुए आमने-सामने
रवि,
रांची: झारखंड कैडर के युवा आईपीएस अंशुमन कुमार ने सरकार और सरकारी तंत्र पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. अंशुमन जामताड़ा के एसपी हैं. वहां के डीसी फैज अहमद मुमताज उनसे जूनियर हैं. मुमताज 2018 बैच के आईएएस है जबकि अंशुमन कुमार 2013 बैच के आईपीएस है.
आईपीएस अंशुमन ने अपने ट्विटर पर लिखा है कि डीसी का पद बेकार है. इसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भू राजस्व का संग्रह नहीं के बराबर होता है. तमाम न्यायिक अधिकार न्यायिक दंडाधिकारियों को मिले हुए हैं. फिर कार्यपालक दंडाधिकारी जैसे पद क्यों बना कर रखे गए हैं.
आईपीएस अफसर के अनुसार सिस्टम में कुछ ऐसा होना चाहिए कि संस्थाएं मजबूत हो. मजबूत संस्थाओं में भटकाव कम होगा. उन्होंने ट्विटर में आगे लिखा है कि भारत में आज भी ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन किया जा रहा है. सभी आईपीसी को लेकर क्यों चल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल पहले पुलिस सुधार के लिए कुछ सुझाव दिए थे लेकिन कुछ नहीं हुआ.
पुलिस राज्य का विषय है. देश में 2 दर्जन से अधिक राज्यों में सरकार है. वह सभी अपने-अपने तरीकों से पुलिस को देखती है. यह नजरिया 5 साल में बदल जाता है. प्रभारी डीजीपी के नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी राज्य में अस्थाई या प्रभारी डीजीपी की नियुक्ति की व्यवस्था नहीं है. यह सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का उल्लंघन है. फिर प्रभारी डीजीपी की नियुक्ति क्यों ?

आगे ट्विटर पर लिखा है कि पुलिस की स्थिति सबसे खराब है. पुलिस की स्वायत्तता सीमित होनी चाहिए लेकिन इतना भी नहीं कि उनका दम घुटने लगे. उन्होंने कहा है कि लोगों को यह अंदाज नहीं होगा कि आईपीएस कितने तनाव में काम करते हैं. कभी-कभी तो उनकी स्थिति सिपाही से भी बदतर हो जाती है. लगातार तबादला और अस्थिरता तो है ही लेकिन कुछ बातें ऐसी भी हैं जो ना लिखी जा सकती हैं और ना ही कही जा सकती है.

इधर 13 अगस्त को जामताड़ा में विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई जब डीसी और एसपी आमने-सामने हो गए. वहां के उपायुक्त ने 15 अगस्त को लेकर बैठक बुलाई थी. बैठक में एसपी नहीं पहुंचे. बाद में डीआईजी को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा.

अंशुमन कुमार की इस टिप्पणी से नौकरशाह में हड़कंप मच गया है. हालांकि अंशुमन कुमार द्वारा की गई टिप्पणी लोक सेवक के आचरण के खिलाफ है.

