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संभावित खतरे का अंदेशा अगर पूर्व से हो तो आसान होता है इससे उबरना

by bnnbharat.com
October 30, 2020
in समाचार
संभावित खतरे का अंदेशा अगर पूर्व से हो तो आसान होता है इससे उबरना
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– दिन-रात संक्रमितों के लिये काम करते खुद संक्रमित हुए कटिहार सदर अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी

– उचित खान-पान, बेहतर जीवनशैली व नियमित योगाभ्यास से कम समय में संक्रमण से उबरने में हुए कामयाब

कटिहार: कोरोना संक्रमण का दौर स्वास्थ्य कर्मियों के लिये अब तक बेहद चुनौती पूर्ण रहा है. संक्रमित लोगों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के क्रम में कई स्वास्थ्य कर्मी अब तक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. ऐसे ही कर्मियों में सदर अस्पताल कटिहार के अस्पताल कर्मी राकेश चंदन (काल्पनिक नाम) का नाम भी शामिल है. संक्रमण काल से जुड़े अपना अनुभव साझा करते हुए राकेश कहते हैं कि विभागीय जिम्मेदारियों के निवर्हन के दौरान संभावित खतरे का उन्हें व उनके परिवार वालों को पूर्व से ही आभास था.

फिर एक दिन वहीं हुआ जिसका अंदेशा मुझे व मेरे करीबियों को पहले से था. तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल के अधिकारी व कर्मियों ने कोरोना जांच की सलाह दी. बिना देर किये कोरोना जांच को तरजीह दी. रिपोर्ट पॉजेटिव आया. तुरंत घर वालों को इसकी सूचना दी गयी. घर वाले पहले से इसे लेकर मानसिक रूप से तैयार थे. इसलिये उन्हें बहुत ज्यादा कुछ समझाने की जरूरत महसूस नहीं हुई. घर पहुंचने से जरूरी तैयारियां हो चुकी थी.

घर के बाहर आधा घंटे तक इंतजार करने के बाद पत्नी ने मेरे जरूरत के सारे सामानों से भरा एक बैग बरामदे के दूसरे छोर पर रख दिया. तब तक मुझे क्वारंटीन सेंटर छोड़ने के लिये एंबुलेंस वाहन भी वहां आ पहुंचा था.

मुश्किल से कटी क्वारंटीन सेंटर पर पहली रात :

सदर अस्पताल कटिहार के स्वास्थ्य कर्मी राकेश चंदन बताते हैं कि उन्हें शहर के एक निजी होटल में क्वारंटिन किया गया था. क्वारंटिन सेंटर पर पहली रात तो बड़ी मुश्किल से कटी. परिवार वालों की लगातार चिंता परेशान कर रही थी. तो परिवार व अपने दो बच्चे से दूरी बहुत खल रही थी. रात भर अनगिनत ख्याल मन में घुमड़ते रहे. उस दौरान शारीरिक तकलीफ भी हो रही थी. गले में खरास, सर्दी व खांसी की शिकायत तो थी ही. जैसे-तैसे रात कटी तो नये संकल्प के साथ दूसरे दिन की शुरूआत करने के संकल्प से आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ. दिलेरी पूर्वक मैंने कोरोना को मात देने की ठान ली थी. इसलिये दोबारा फिर कभी खुद के बीमार होने का अफसोस तक नहीं हुआ.

जीवनशैली व अपने खान-पान पर दिया ध्यान :

संक्रमण अवधि से जुड़ी अपनी यादें साझा करते हुए राकेश कहते हैं कि इस अवधि के दौरान उन्होंने अपने जीवनशैली व खान पान पर विशेष ध्यान दिया. घर से तो काजू, किसमिस, गिलोय, मधु जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ दिये ही गये थे. उनके नियमित सेवन पर विशेष जोर दिया. फिर अस्पताल व अपने अन्य साथियों की मदद से गिलोय च्वनप्राश जैसे सामान बाजार से भी मुझ तक पहुंच चुके थे. इस दौरान में दूध के नियमित सेवन को भी तरजीह दी. नियमित रूप से फल, हरी साग सब्जी के साथ अन्य पौष्टिक आहार को अपने दैनिक खानपान में शुमार किये जाने के कारण संक्रमण अवधि काफी लंबा नहीं खींच सका. धीरे-धीरे मैं पहले से बेहतर महसूस करने लगा था.

योगाभ्यास व प्राणायाम संक्रमण से लड़ने का अचूक हथियार :

राकेश कहते हैं कि योगाभ्यास व प्राणायाम का नियमित अभ्यास आपको कई तरह की बीमारियों से निजात दिला सकता है. इसके साथ ही किसी तरह के नाकारात्मक विचारों से खूद को दूर रखने का भी यह अचूक हथियार है. संक्रमण अवधि के दौरान मोबाइल पर यूट्यूब वीडियो के जरिये मैंने योगाभ्यास व प्राणायाम का नियमित अभ्यास शुरू कर दिया. इसके लिये एक तय समय भी निर्धारित कर ली. सुबह एक घंटे व फिर रात सोने से पूर्व एक घंटे लगातार योग्भयास व प्राणायाम का अभ्यास करता रहा. इससे एक तो इस दौरान नाकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखने में मदद मिली. तो कोरोना जैसे संक्रामक बीमारी से लड़ने के लिये शरीर भी मजबूती से तैयार हो उठा. लिहाजा महज सात दिन में ही कोरोना संक्रमण का मात देकर मैं पूरी तरह स्वस्थ होने मं कामयाब रहा.

रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी कुछ दिनों तक अपनों से बनाये रखी दूरी :

सात दिन बाद अस्पताल कर्मी राकेश कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्त हो चुके थे. बावजूद इसके उन्होंने कुछ दिनों तक अपनों से दूरी बनाये रखी. ताकि उनकी वजह से कोई दूसरा संक्रमण की चपेट में न आ जाये. संक्रमित होने के 14 दिन बाद वे फिर से अपने कार्य में जुट गये. राकेश बताते हैं कि अभी कोरोना संक्रमण का खतरा टला नहीं है. हर दिन संक्रमण के नये मामले सामने आ रहे हैं. लिहाजा इसे लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत से इंकार नहीं किया जा सकता है. इसलिये नियमित रूप से मास्क का सेवन, बेहतर खानपान, सार्वजनिक जगहों पर थूकने से परहेज आपस में दो गज की दूरी आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है. जितना की पहले था. जब तक कोरोना को कोई माकूल इलाज या टीका नहीं आ जाता है, तब तक इस तरह के एहतियाती कदम जरूरी भी हैं और अनिवार्य भी. लोगों को इसका पालन जरूर करना चाहिए.

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