रांची: राज्य के कृषि मंत्री बादल ने कहा है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) से उत्पन्न वैश्विक महामारी के बीच जेल से कैदियों को पेरोल पर रिहा कर जेल की भीड़ कम की जा सकती है.
उन्होंने इसके लिए विधिक प्राधिकरण और जेल प्रशासन के अधिकारियों को शामिल कर उच्चस्तरीय समिति के गठन करने का सुझाव दिया है.
कृषि मंत्री ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने 16 मार्च को मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर की पीठ ने कोरोना महामारी के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के लिए राज्यों को उच्चस्तरीय समिति शक्ति संपन्न समिति गठित करने को कहा है.
जो यह तय करेगी कि किस श्रेणी के अपराधियों-मुकदमों के तहत पेरोल पर या अंतरिम जमानत दी जा सकती है.
अधिकतम 7 वर्षों की सजा काट रहे कैदियों को पेरोल-अंतरिम जमानत पर उच्चस्तरीय समिति के द्वारा विचारोपरांत रिहा करने का निर्देश उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को 16 मार्च को दिया है.
जिसके बाद मध्य प्रदेश में 5 साल तक की सजा काट रहे कैदियों को पेरोल देने का निर्णय लिया गया है. जबकि उत्तर प्रदेश में भी 1618 कैदियों को रिहा किया गया है. 71 जेलों में 11 हजार कैदियों को रिहा किया जाएगा.

