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कहां तुम चले गये…..गजल सम्राट की पुण्यतिथि आज

by bnnbharat.com
October 10, 2019
in Uncategorized
कहां तुम चले गये…..गजल सम्राट की पुण्यतिथि आज
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गजल सम्राट नाम से मशहूर जगजीत सिंह उर्फ जगजी​त दादा की मखमली आवाज का जादू आज भी लोगों पर चढ़ा हुआ है. जब भी गजलों का ​जिक्र होता है जगजीत सिंह का नाम सबसे पहले ​याद किया जाता है. आज उनकी पुण्यतिथि है. 10 अक्टबूर 2011 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में ब्रेन हैमरेज के कारण उनका निधन हो गया था.

जगजीत सिंह ने अपनी पढ़ाई जालंधर के डीएवी कॉलेज से की थी. वे वहां हॉस्टल में रहते थे, लेकिन उनके साथ कोई कमरे में रहना पसंद नहीं करता था. क्योंकि जगजीत सिंह सुबह पांच बजे उठ कर दो घंटे रियाज करते थे. वे न खुद सोते थे, न बगल में रहने वाले लड़कों को सोने देते थे.

जगजीत के पिता चाहते थे कि वो पढ़-लिखकर आईएएस बने लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. उन्होंने एमए तक पढ़ाई की, लेकिन उनकी दिलचस्पी सिंगिंग में थी इसलिए अपना करियर बनाने मुंबई पहुंच गए.

बहुत कम लोग ही इस बात को जानते होंगे कि ऑल इंडिया रेडियो के जालंधर स्टेशन ने उन्हें उपशास्त्रीय गायन की शैली में फेल कर दिया था. उनके गीतों और गजलों ने सबके दिलों पर ऐसा जादू बिखेरा की उन्हें गजल सम्राट कहा जाने लगा.

जगजीत सिंह तो अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी आवाज आज भी सुनने वालों को बेहद सुकून देती है. उनकी पत्नी चित्रा सिंह का भी काफी नाम हैं. वह भी अपनी गजलों के लिए काफी जानी जाती हैं. लोग आज भी दगजीत की मधुर आवाज सुनने के लिए तरसते हैं। लोग जब उकी आवाज सुनते हैं तो बेहद खुश हो जाते हैं.

जगजीत का पहला एलबम ‘द अनफॉरगेटेबल्स (1976)’ हिट रहा. जगजीत ने गजलों को जब फिल्मी गानों की तरह गाना शुरू किया तो आम आदमी ने गजल में दिलचस्पी दिखानी शुरू की. जगजीत जी ने क्लासिक शायरी के अलावा साधारण शब्दों में ढली आम-आदमी की जिंदगी को भी सुर दिए. जगजीत सिंह ने 150 से ज्यादा एलबम बनाईं। गजल को लेकर जगजीत सिंह सबसे अधिक लोकप्रिय हैं.

जगजीत ने अपनी मखमली आवाज के जरिए गजलों को नया जीवन दिया. ‘तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है’, ‘झुकी झुकी सी नजर बेकरार है कि नहीं’,’तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो’, ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’,’प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है’, ‘होश वालों को खबर क्या’, ‘कोई फरियाद’,’होठों से छू लो तुम’, ‘ये दौलत भी ले लो’, ‘चिठ्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश’ जैसी फिल्मी गजलें पेश कीं. वहीं गैरफिल्मी फेहरिस्त में ‘कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा’, ‘सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता-आहिस्ता’, ‘वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी’ जैसी मशहूर गजलें शुमार हैं.

जगजीत सिंह को 2011 में यूके में गुलाम अली के साथ परफॉर्म करना था, लेकिन इससे पहले सेरिब्रल हैमरेज के चलते उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी हालत बिगड़ती चली गई और वो कोमा में चले गए. 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह को अंतिम सांसे ली.

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