रांची. झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के संयोजक विमल कच्छप ने झामुमो विधायक मथुरा महतो द्वारा विधायकों के घेराव के कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब आंदोलनकारियों के प्रति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रुख सकारात्मक है और उन्होंने आयोग गठन, पेंशन वृद्धि एवं 5 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा कर दी है, तो ऐसे में विधायकों के घेराव का औचित्य क्या है?
कच्छप ने कहा कि विधायक मथुरा महतो कहाँ थे जब झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा लगातार 15 वर्षों से अपने मुद्दों को लेकर संघर्षरत था. विगत दो माह में मोर्चा ने प्रखंड और जिला स्तर पर हजारीबाग, बोकारो, लातेहार, खूंटी, गुमला, रांची, सिल्ली, रातू, मांडर आदि स्थानों पर लगातार सम्मेलन कर आंदोलनकारियों को एकजुट तथा जागरूक करने का कार्य किया है, जिससे राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा और मुख्यमंत्री ने स्वयं सकारात्मक पहल की. राज्य के आंदोलनकारियों को आशा है कि मुख्यमंत्री स्वयं आंदोलनकारी का पुत्र होने के नाते आगे भी अन्य कदम उठाएंगे और आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानी के समकक्ष सुविधाएं देंगे तथा अन्य मांगों को भी पूरा करेंगे.
कच्छप ने कहा कि हजारों झारखंड आंदोलनकारी 20 वर्ष से सम्मान तथा पेंशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन मोर्चा को छोड़कर किसी ने आवाज नहीं उठाई. अब जबकि मुख्यमंत्री ने पहल कर दी है तो मथुरा महतो आंदोलन तथा विधायकों को घेरने की बात कर रहे हैं और आंदोलनकारियों को भ्रमित कर रहे हैं. इससे गलत संदेश जा रहा है. मोर्चा ने मथुरा महतो से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री की सकारात्मक पहल को और आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं.
