झामुमो ने वनाधिकार पर आदिवासियों और मूल वासियों के पक्ष में धरना देने का किया ऐलान
झाखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही झारखंड मुक्ति मोर्चा नहीं आंदोलन की घोषणा कर दी है वनाधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकारों को लेकर पार्टी द्वारा हेमंत सोरेन के नेतृत्व में और तमाम विधायकों की उपस्थिति में धरना दिया जाएगा इसमें वनोपज पर आधारित जीवन यापन के आदिवासियों और मूल वासियों के अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद किया जाना है झामुमो का कहना है की सरकार के नियम से धीरे धीरे आदिवासियों और मूल वासियों का जीवन पर अधिकार प्रभावित हो रहा है जिससे झारखंड में आदिवासियों और मूलवासी वन से कटते जा रहे हैं और उन्हें जीवन यापन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए जन आंदोलन से उपजी झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए झारखण्ड विधानसभा का अंतिम सत्र मॉनसून सत्र भी शायद दमदार रूप से आंदोलन करने का अच्छा मौका है इसीलिए दूरदराज के इलाकों तक अपने आंदोलन को पहुंचाने के लिए वन क्षेत्र में रहने वाले
29 प्रतिशत आबादी प्रभावित
आदिवासियों और मूल वासियों के जीवन संकट का मुद्दा उठाकर राजभवन के समक्ष राजनीतिक गुहार लगाएगी और पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम सेरविवार को इसका ऐलान कर दिया है सोमवार को राजभवन के समक्ष आयोजित इस धरने में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन इस धरने का नेतृत्व करेंगे मौके पर पार्टी के तमाम विधायक भी उपस्थित रहेंगे इसके अलावे सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वन अधिकार और आदिवासियों मूल वासियों के अधिकार का मुद्दा उठाने वाले तमाम समाजिक संगठन इस धरने में अपनी आवाज बुलंद करेंगे
झामुमो की सोच है झारखंड में 29 प्रतिशत वन है और इससे 32 हजार से ज्यादा गांव वन क्षेत्र के गांव हैं और आबादी के अनुपात में भी 45000 से भी ज्यादा परिवार इससे प्रभावित है और वन कानून से इन तमाम लोगों पर संकट दिख रहा है इसलिए आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है और झामुमो उनके अधिकारों के लिए आंदोलन कर रही है राजभवन के पास धरना के साथ साथ महामहिम महोदय को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रपति तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।

