◆ चुनाव आयोग से अतिरिक्त पारा मिलिट्री फ़ोर्स तैनात करने की माँग
◆ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रही है पश्चिम बंगाल प्रशासन : कुणाल षाड़ंगी
◆ संभावित हार को नज़दीक देखकर हिंसा पर उतरे टीएमसी समर्थक : कुणाल षाड़ंगी
New Delhi:- पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के दौरान जिस तरह से हिंसक घटनाएँ राजनीतिक संरक्षण में घट रही है और सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकार्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा हैजो लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने इन घटनाओं की भर्त्सना करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इसका मुख्य कारक बताया. कहा कि सीएम के निर्देश पर बंगाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता की तरह वर्ताव कर रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पिछले तीन दिनों के अंदर पश्चिम बंगाल में भाजपा के बड़े नेताओं को निशाना बनाकर नुक्सान पहुंचाने का प्रयास हुआ है. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के बिरसा मुंडा सिद्धो कान्हु सम्मान यात्रा के रथ पर हमला, सांसद अर्जुन सिंह के घर पर दर्जनों बम से हमला और गुरुवार को नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की चुनावी सभा में भाजपा कार्यकर्ता के सिर पर घातक हमला लोकतंत्र की सरेआम हत्या का प्रत्यक्ष नमूने हैं. झारखंड प्रदेश भाजपा ने टीएमसी समर्थित हमलों की निंदा करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग से माँग किया है.
कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से अतिरिक्त पैरा मिलिट्री फ़ोर्स की प्रतिनियुक्ति की जाये और हर वह प्रबंध सुनिश्चित किया जाये जिससे पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हो सके.
कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि अपनी संभावित हार बंगाल में परिवर्तन की लहर को देखकर तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता हिंसा पर उतर आये हैं. कहा कि आने वाले दिनों के लिए यह कदापि शुभ संकेत नहीं माना जा सकता.
प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों और वरीय नेताओं पर हमले की घटनाओं पर चुनाव आयोग से अविलंब हस्तक्षेप और त्वरित कार्रवाई की माँग की है. कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि भाजपा के तीन वरीय नेताओं पर हमला करने की कोशिश हुई है, उनके कार्यक्रमों को बाधित करने का दुस्साहस हुआ है. कहा कि प्रशासनिक तंत्र को राजनीतिक विद्वेष के साथ इस्तेमाल करने की निंदनीय परंपरा जो टीएमसी ने बंगाल में शुरू की है उसपर चुनाव आयोग रोक लगाये ताकि भारत की जनता का चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अटूट विश्वास बरकरार रहे.

