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झारखंड ब्यूरोक्रेसी : टॉप लेवल के आईएएस का राज्य से मोह भंग

by bnnbharat.com
December 14, 2020
in समाचार
सरकार का प्रमोटी IAS पर भरोसा, सौंपी पांच जिलों की कमान
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खास बातें:-

रिटायर हो गए पर लौटकर नहीं आए कभी झारखंड

कम समय के लिए रहे,  दिल्ली की ओर किया रूख

पॉलिटिकल मैच्योरिटी का भी कई ने दिया हवाला

रांचीः  झारखंड कैडर के कई टॉप लेवल के आइएएस अफसरों का झारखंड से मोह भंग होता नजर आ रहा है. कई तो रिटायर हो गए, लेकिन वापस अपने कैडर में नहीं आए. कई आए भी तो कुछ समय के लिए ही, फिर दिल्ली का रूख कर लिए. झारखंड गठन के बाद से आइएएस अफसर राजीव कुमार झारखंड नहीं आए. उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ही काम करना मुनासिब समझा. वे इसी साल फरवरी में रिटायर भी हो गए. इसी तरह स्मिता चुग भी काफी कम समय के लिए झारखंड आई. इसके बाद वह दिल्ली में ही रहीं और रिटायर हो गईं. 1992 बैच की ज्योत्सना वर्मा रे बर्खास्त होना मुनासिब समझा, लेकिन उन्होंने झारखंड में योगदान नहीं दिया.

फिलहाल 1990 बैच के अफसर मुखमित सिंह भाटिया भी काफी कम समय के लिए झारखंड में रहे. रघुवर सरकार के समय समाज कल्याण विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई थी. वे इस विभाग के प्रधान सचिव के पद पर रहे, फिर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति‍ पर चले गए. इसी तरह 1987 बैच के इंदु शेखर चतुर्वेदी कम समय के लिए झारखंड आए. वन विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में सेवा दी. फिर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति‍ में चले गए. टी नंदकुमार और एके चुग ने भी झारखंड के बजाए दिल्ली में ही रहना उचित समझा.

क्या कहा अफसरों ने

राज्य के एक वरिष्ठ आईएएस ने सरकार और सरकार की व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जतायी है. कहते हैं, ऐसी व्यवस्था में काम करने से काफी असहज महसूस करता हूं. राज्य गठन के 20 साल हो गए. कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन अब तक झारखंड में पॉलिटिकल मैच्योरिटी नहीं दिखी. सही सुझाव देने पर वे इग्नोर भी कर दिया जाते हैं. वहीं झारखंड में एक्पपोजर नहीं मिल पाता. छोटे-छोटे प्रोजेक्टों में ही उलझ कर रहना पड़ता है.

लॉबी भी है बड़ा फैक्टर

वरिष्ठ आईएएस अफसर ने कहा है कि प्रदेश में आईएएस लॉबी भी एक बड़ा फैक्टर है. अगर कोई आईएएस बेहतर काम कर रहा है तो सरकार से मिलकर एक नया रूप देने की कोशिश की जाती है. इस कारण परफॉरमेंस करने वाले अफसर फाइल करने से डरते हैं. अब तो नया ट्रेंड यह भी चल गया है कि छोटी-छोटी बातों में आईएएस अफसरों के बीच रिएक्शन ज्यादा होता है. कई आइएएस अफसरों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने के सवाल पर कहा कि परफॉरमेंस करने वाले अफसरों को छोटे-छोटे प्रोजेक्ट में डाल दिया जाता है, जिससे उन्हें एक्सपोजर नहीं मिल पाता. कुछ आईएएस निजी कारणों से भी प्रतिनियुक्ति में जाना चाहते हैं, क्योंकि उनके बच्चों की पढ़ाई दिल्ली में चल रही होती है.

छह IAS ले चुके हैं VRS

राज्य गठन के बाद से अब तक छह IAS अफसरों ने VRS ले लिया है. इसमें मुनिगला, विमल कीर्ति सिंह, जेबी तुबिद, संत कुमार वर्मा और बीके चौहान के नाम शामिल हैं. सीएस रैंक के अफसर सह कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल ने भी VRS के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया.

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