रांची: कोरोना संक्रमण के कारण झारखंड के कई स्कूल क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में तब्दील कर दिए गए जबकि स्वास्थ्य केंद्रों का उपयोग आइसोलेशन सेंटर के रूप में किया गया.
झारखंड में 3500 से अधिक स्कूलों का उपयोग क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में उपयोग किया गया.
इन स्कूलों को भविष्य में खोलने से पहले यह आवश्यक है कि उसे अच्छे तरीके से सेनिटाइज किया जाए. इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि स्कूल प्रशासन को कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों स्वच्छता के नियमों तथा स्कूल भवनों को संक्रमणमुक्त रखने के उपायों के बारे बताया जाए.
इसको ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार ने यूनिसेफ के साथ मिलकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्यूर का ई-माॅड्यूल विकसित किया है. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी शिक्षक, शिक्षाविद् तथा दूसरे अन्य हितधारक स्वच्छता एवं सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक हों. ई-माड्यूल को बुधवार को आयोजित विशेष वेबिनार कार्यक्रम ‘कोविद-19 के दौरान स्कूलों में जागरूकता एवं तैयारी’ के दौरान लांच किया गया.
इस अवसर पर बोलते हुए शिक्षा विभाग के सचिव राहुल शर्मा ने कहा, “यह बहुत आवश्यक और महत्वपूर्ण है कि जब दुबारा स्कूल खुले तो कोविड-19 से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाए जाएं. इसके लिए उचित तैयारी जरूरी है ताकि महामारी से लड़ा जा सके एवं साथ ही बच्चों को भी सुरक्षित तरीके से शिक्षा प्रदान की जा सके. स्कूलों में पेयजल एवं स्वच्छता की बेहतर सुविधा छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा अन्य स्कूली कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए आवश्यक है.”
जेइपीसी के राज्य परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने कहा, “हम सभी बच्चों को शिक्षा प्रदान करने हेतु कटिबद्ध हैंए लेकिन स्कूलों के दुबारा खुलने पर महामारी को काबू में रखना एक चुनौती होगी. तकनीक का उपयोग इसमें मददगार साबित हो सकता है. सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य होना चाहिए कि वे ई.लर्निंग माॅड्यूल के माध्यम से कोविड.19 से बचाव के बारे में प्रशिक्षण प्राप्त कर इसका प्रमाण पत्र भी प्राप्त करें.”
“ई-लर्निंग माॅड्यूल स्कूलों में सामाजिक तथा व्यक्तिगत स्वच्छता अभ्यास के कार्यान्यवन तथा निगरानी में मदद करेंगे साथ ही स्कूल परिसर को स्वच्छ रखने हेतु निर्देशित प्रोटोकाॅल के पालन में भी स्कूलों को सहायता प्रदान करेंगे.”
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के मिशन डायरेक्टर डॉ शैलेश चौरसिया ने कहा, “स्कूल खुलने के बाद स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा सहायक कर्मचारियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी. सिविल सर्जनों, जिला शिक्षा अधिकारियों तथा जिला शिक्षा अधीक्षकों के बीच समन्वय स्कूलों में स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी. इसके अलावा कोरोना की जांच तथा संक्रमित मरीजों का आइसोलेशन एवं तत्काल उपचार भी आवश्यक है. प्रवासी परिवार के बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.”
जो सुझाव एवं उपाय बताए गए हैं वे कोविड-19 पर राष्ट्रीय स्तर पर दिए गए दिशा निर्देशों राज्य स्तर पर अपनाए गए विभिन्न हस्तक्षेपों तथा यूनिसेफ एवं राज्य शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के बीच गहन चर्चा एवं व्यापक शोध के परिणाम हैं.
वेबिनार कार्यक्रम में बोलते हुए यूनिसेफ इंडिया की रिप्रजेंटेटिव डॉ यास्मीन अली हक ने झारखंड सरकार को बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर स्कूलों में कोरोना संक्रमण से बचाव तथा स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई ई-माॅड्यूल (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्यूर) प्रशंसनीय है. उन्होंने कहा यह जानकर काफी प्रसन्नता हुई कि झारखंड के 22,000 से अधिक शिक्षकों ने पहले ही ई-माॅड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है. कोविड-19 से बचाव तथा स्कूलों में जल एवं स्वच्छता के मानकों को सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई यह ई-माॅड्यूल झारखंड के लिए वरदान साबित होगी. यूनिसेफ इसके कार्यान्वयन, विशेषकर इसकी निगरानी तथा शिक्षकों एवं सुपरवाइजरों के क्षमता संवर्द्धन में सहयोग प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है.
डॉ यास्मीन ने कहा कि झारखंड ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के लिए एक राज्य कार्ययोजना पहले ही विकसित कर ली है. अतः यह उपयुक्त समय है कि इसको लेकर एक विशेष कार्यक्रम भी तैयार किया जाए. जिसमें स्वच्छता व्यवहारों पर ध्यान केंद्रित किया जाय क्योंकि यह लड़कियों के स्कूल न जाने तथा स्कूलों में उनकी कम उपस्थिति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारण हैै. उन्होंने कहा, “यह एक बहु-क्षेत्रीय मुद्दा है और इसलिए मैं झारखंड सरकार से अनुरोध करूंगी कि वे शिक्षा विभाग के नेतृत्व में स्वास्थ्य महिला एवं बाल विकास तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की मदद से सुरक्षित माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को लेकर एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम की योजना बनाने पर विचार करें.”
यह वेबिनार शिक्षकों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूलों में स्वच्छता एवं सफाई के प्रति जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था. यह शिक्षकों के लिए भी एक अवसर था जिसमें कोविड-19 से लड़ने तथा इससे बचाव के उपायों के बारे में जानने का उन्हें एक अवसर प्राप्त हुआ.
इस अवसर पर सीसीएल के सीएमडीए गोपाल सिंह तथा बिहार एवं झारखंड रोटरी इंटरनेशल के रंजन गंडोत्रा ने भी वक्ता के तौर पर अपने विचार व्यक्त किए.

