ब्यूरो चीफ,
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 14.7.2016 को घोषित स्थानीय नियोजन नीति पर रोक लगा दी है . प्रभारी मुख्य न्यायाधीश एचएस मिश्रा और न्यायाधीश दीपक रौशन की खंडपीठ ने पलामू की सोनी कुमारी की याचिका की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया. अदालत ने पूरे मामले को वृहद न्यायालय में ट्रांसफर करते हुए चार नवंबर से नियमित सुनवाई का फैसला सुनाया. अदालत के फैसले से राज्य कर्मचारी चयन आयोग और झारखंड लोक सेवा आयोग की तरफ से जारी नियुक्ति की प्रक्रिया अब बाधित हो गयी है. इससे हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति पर भी ग्रहण लग गया है. याचिकाकर्ता सोनी कुमारी ने शिक्षक नियुक्ति में 13 अनुसूचित जिलों में शत-प्रतिशत स्थानीयों के आरक्षण को चुनौती दी थी. उन्होंने कहा था कि सरकार की स्थानीय नियोजन नीति से गैर अनुसूचित जिले वाले अभ्यर्थी इन 13 जिलों में अपना आवेदन नहीं दे सकते हैं, जो पूरी तरह असंवैधानिक है. उन्होंने कहा था कि स्थानीय नियोजन नीति की वजह से तृतीय औऱ चतूर्थ वर्ग के पदों पर होनेवाली बहाली भी प्रभावित हो रही थी, जो गलत है. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 14 दिसंबर 2016 को मामले को खंडपीठ में ट्रांसफऱ कर दिया था. याचिकाकर्ता ने सरकार की स्थानीय नीति की अधिसूचना और शिक्षक नियुक्ति तथा तृतीय तथा चतूर्थ वर्ग के पदों के विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की थी. हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 28.12.2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 को विज्ञापन निकाला गया था.

