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झारखंड की राजनीति संथाल शिफ्ट, झामुमो का होगा लिटमस टेस्ट

by bnnbharat.com
December 17, 2019
in समाचार
झारखंड की राजनीति संथाल शिफ्ट, झामुमो का होगा लिटमस टेस्ट

झारखंड की राजनीति संथाल शिफ्ट, झामुमो का होगा लिटमस टेस्ट

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खास बातें:-

  • सोरेन परिवार की साख दांव पर, बीजेपी को मोदी मैजिक का सहारा

  • जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की प्रतिष्ठा दावं पर

  • हेमंत सोरेन बरहेट और दुमका दोनों सीटों से लड़ रहे हैं चुनाव

  • संथाल की 16 सीटों पर 20 दिसंबर को होना है मतदान

रांचीः झारखंड की राजनीति पूरी तरह से संथाल शिफ्ट कर गई है. झामुमो का गढ़ माने जाने वाले संथाल में बीजेपी सेंधमारी के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. बीजेपी को मोदी मैजिक पर भी भरोसा है.

वहीं अपने गढ़ को बचाने के लिए झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन पसीना बहा रहे हैं. वहीं झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी भी संथाल के सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों के पक्ष में सभाएं कर रहे हैं. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो भी संथाल पर पूरा फोकस किए हुए हैं.

सोरेन परिवार की प्रतिष्ठा दावं पर

पांचवें और अंतिम चरण में सोरेन परिवार के दो सदस्य चुनावी मैदान में हैं. खुद हेमंत सोरेन दो सीट दुमका और बरहेट से चुनावी मैदान में हैं. वहीं उनकी भाभी सीता सोरेन जामा विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रही हैं. ऐसे में इस चुनाव में झामुमो का लिटमस टेस्ट भी होगा.

2014 के विधानसभा चुनाव में हेमंत ने बरहेट से जीत हासिल की थी, लेकिन दुमका सीट से वे चुनाव हार गए थे.

दुमका में हेमंत और लुईस मरांडी के बीच सीधी फाइट

दुमका में हेमंत सोरेन को लुईस मरांडी से कड़ी चुनौती मिल रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव दुमका सीट झामुमो के हाथों से निकल गई थी.

बीजेपी के सुनील सोरेन ने झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को शिकस्त दी थी. इस सीट से शिबू सात बार सांसद रह चुके थे. इस सीट पर आखिरी चरण की वोटिंग से ठीक पहले जमीनी हालात जानने और प्रचार अभियान के लिए हेमंत सोरेन दुमका के पुश्तैनी घर में शिफ्ट हो गए हैं.

जामा में 39 साल में सिर्फ एक बार हारा है जेएमएम

जामा में जेएमएम पिछले 39 साल में सिर्फ एक बार ही हारा है. 2005 के चुनाव में बीजेपी यह सीट जेएमएम से छीनने में कामयाब हुई थी.

1985 में जेएमएम संस्थापक शिबू सोरेन इस सीट से 1985 में जीते थे और इसके बाद लगातार दो बार उनके बेटे दुर्गा सोरेन यहां से कामयाब हुए.

2005 में दुर्गा बीजेपी के सुनील सोरेन से हार गए थे. दुर्गा के निधन के बाद उनकी पत्नी सीता सोरेन ने इस सीट से 2009 और 2014 में जीत दर्ज की. वह लगातार तीसरी बार इस सीट से मैदान में हैं. हालांकि 2014 में उनकी जीत का मार्जिन 2009 के 12000 वोटों से घटकर 2,300 पर पहुंच गया था.

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