- जेएनयू घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी
- जेएनयू एलुमनाई झारखंड चैप्टर के बैनर तले विरोध प्रदर्शन
रांचीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में बीते 5 जनवरी को कैंपस के अंदर छात्रों शिक्षकों एवं कर्मचारियों के ऊपर नकाबपोश गुंडों ने जानलेवा हमला किया था जिसमें कई छात्र शिक्षक एवं कर्मचारी पूरी तरह से घायल हो चुके हैं 20 से ज्यादा लोगों को एम्स के ट्रॉमा सेंटर में एडमिट कराया गया है.
जेएनयू एसयू की छात्रा एवं कई ऐसे छात्र हैं जिन्हें बुरी तरह से उनके शरीर को गुंडों द्वारा डैमेज किया गया है. इस घटना के विरोध में जेएनयू एलुमनाई झारखंड चैप्टर के बैनर तले आज अल्बर्ट एक्का चौक पर मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया.
इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में जेएनयू के पूर्व छात्र जो रांची झारखंड मैं रहते हैं वह एकत्रित हुए जेएनयू के छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सोलिडेरिटी में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख बुद्धिजीवियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
जेएनयू के पूर्व छात्र एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ0 एम0 तौसीफ ने कहा कि गृह मंत्रालय, कुलपति एवं दिल्ली पुलिस के इशारे पर जेएनयू में नकाबपोश गुंडों ने एंट्री ली और बेकसूर छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को निशाना बनाया.
उन पर जानलेवा हमला किया और उनको बुरी तरह से घायल कर दिया केंद्र सरकार छात्रों की आवाज को गुंडों के द्वारा दबाना चाहती है भारतीय जनता पार्टी की सरकार जब से केंद्र में आई है शिक्षण संस्थानों को टारगेट किया है, वह नहीं चाहती के छात्र अपने अधिकार के लिए अपनी आवाज को बुलंद करें.
जेएनयू एक ऐसा इंस्टिट्यूशन है जहां के छात्र छात्राओं के अंदर इतना अवेयरनेस है की देश में कहीं भी किसी पर अत्याचार होता है तो सबसे पहले जेएनयू के छात्र उस अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करते हैं.
जेएनयू के पूर्व छात्र एवं समाजसेवी उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा के केन्द्र सरकार ने जेएनयू को टारगेट कर रखा है, नरेन्द्र मोदी, अमित शाह तथा भारतीय जनता पार्टी के कई मंत्री एवं नेताओं ने जेएनयू को शटडाउन करने की बात पूर्व में भी कहा है.
यह घटना कुलपति के द्वारा सनीयोजित तरीके से किया गया है. दक्षिण पंथी ताकतें शिक्षण संस्थानों को नष्ट करना चाहती है. देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आरएसएस अपना दबदबा जमाना चाहती है जो अपने मंसूबे में सफल नहीं होगी.
इस घटना के जिम्मेदार पुलिस प्रशासन एवं वाइस चांसलर है यह घटना अति निंदनीय है. प्रो0 हिमादूरी सिन्हा ने कहा कि वाइस चांसलर कैंपस के वातावरण को खराब होने से नहीं बचा सके, इस तरह की घटना अपने आप में चिंतनीय है. किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की घटना को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. किसी भी समस्या का समाधान डायलॉग के द्वारा किया सकता है.
उन्होंने कहा कि मैं खुद आइआइटी का स्टूडेंट हूॅं और जेएनयू कम्प्यूनिटी के साथ खड़ा हूॅं. जेएनयू के पूर्व छात्र प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि जेएनयू में जो घटना हुई है अति निंदनीय है छात्रों को टारगेट करना किसी भी तरह से सही नहीं है .
इस घटना के न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि सही बात देश की जनता को पता चल सके. इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से जेएनयू के पूर्व छात्र सह झारखण्ड प्रदेश कॉंग्रेस के प्रवक्ता डॉ0 एम0 तौसीफ, उपेन्द्र कुमार सिंह, प्रो0 आनन्द, प्रो0 हिमादूरी सिन्हा, मदन लाल महतो, उदय कुमार, रशमी पेंगुआ, आनन्द कुमार, राकेश सिन्हा, नदीम अहमद खान, प्रभात कुमार, इस्तियाक अहमद, राजीव नारायण प्रसाद, संजय तिवारी, नौशाद, राजीव चन्द्र राजू, राजीव प्रकाश चौधरी सहित सैकड़ों की संख्या में जेएनयू के छात्र-छात्रा शामिल थे.

