सेंटियागो में चल रहे अंतिम मैच में भारतीय टीम ने चिली को 2-1 से किया पराजित
16 में से 10 गोल झारखंड की तीन बेटियों ने दागे
रांची: झारखंड की बेटियों की बदौलत सेंटियागो चिली में जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की बादशाहत बरकरार रही. सांतियागो में सोमवार सुबह खेले गये अंतिम मैच में भारतीय टीम ने चिली को 2-1 से पराजित किया. भारतीय टीम की ओर से झारखंड की ब्यूटी डुंगडुंग ने दो गोल कर जीत दिलायी.
सेंटियागो चिली पर दौरे पर गई जूनियर भारतीय महिला टीम ने आज अपने छठे और अंतिम मैच में सीनियर चिली टीम को 2-1 से पराजित कर प्रतियोगिता में पांचवीं जीत दर्ज की. आज के मैच में झारखंड के सिमडेगा जिले की रहने वाली खिलाड़ी ब्यूटी डुंगडुंग ने दोनों गोल कर टीम को 2-1 से जीत दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने पांच जीत दर्ज की है. इस दौरे में झारखंड की खिलाड़ियों का प्रभाव रहा.
प्रतियोगिता में कुल 16 गोल हुए हैं जिसमें झारखंड की बेटियों ने कुल 10 गोल किए. इस टीम में कुल 24 खिलाड़ियों का दल सेंटियागे गया है जिसमें झारखंड के तीन खिलाड़ी सुषमा कुमारी ,संगीता कुमारी और ब्यूटी डुंगडुंग शामिल हैं.
ब्यूटी डुंगडुंग ने कुल 5 गोल, संगीता कुमारी ने कुल 4 गोल और सुषमा कुमारी ने एक गोल किए. इस तरह प्रतियोगिता का कुल 16 में से 10 गोल झारखंड की बेटियों के नाम रहा, जो अपने आप में बहुत बड़ी सफलता है. सिमडेगा जिला के जंगलों पहाड़ों से निकलकर चिली में फतह करने वाली बेटियों को हॉकी झारखंड के पदाधिकारियों की ओर से बधाई दी गयी है. पदाधिकारियों ने कहा कि कोरोना काल के विपरीत परिस्थिति में भी अपने आप को फिट रखकर इन बेटियों ने झारखंड का मान बढ़ाया है.
हॉकी झारखंड के पदाधिकारी मनोज कोनबेगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी के कारण जब सभी खेल छात्रावास औरखेल की गतिविधियां बंद हो गई थी. तब ये बेटियां भी इससे प्रभावित थी और अपने घरों में कैद हो गयी थी. लेकिन ये सभी निराश नहीं हुई और अपने गांव के ही खेत खलियान में खुद से अभ्यास कर अपने आप को फिट रखा.
इस दौरान हॉकी झारखंड के पदाधिकारी इनके घरों तक पहुंचकर इन्हें प्रोत्साहन देते रहे, जिससे इन सभी ने अपना आत्मविश्वास बरकरार रखने में सफलता प्राप्त की और आज पूरी दुनिया में झारखंड का डंका बजाने में सफलता हासिल की.
मनोज ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम में शामिल झारखंड की इन बेटियों के घर तक पहुंचने के लिए न तो सड़क है और न ही शुद्ध पेयजल या बिजली की सुविधा है, पौष्टिक आहार के बिना जंगली साग के पत्तों पर निर्भर रहने वाली इन बेटियों के प्रदर्शन से पूरा झारखंड गर्व महसूस कर रहा है.

