BNN DESK: आषाढ़ अमावस्या 21 जून को कंकणाकृति सूर्यग्रहण होगा, इसी दिन शनि, गुरु, शुक्र और बुध ग्रह उल्टी चाल में होंगे, राहु, केतु सदैव उल्टी दिशा में ही चलते हैं, इस तरह से यह 6 ग्रह अपने प्रभाव के कारण आकाश में अद्भुत नजारा दिखाएंगे, जिस पर वैज्ञानिकों की नजर भी लगी हुई है, आसमान में दिन में तारे टिमटिमाते दिखाई देंगे और लगभग 30 सेकंड के लिए दिन में रात नजर आएगी.
टिम टिम करते तारे आएंगे
कई राशियों के ग्रह नक्षत्र ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 21 जून को शुक्र ग्रह सूर्य से लगभग 25 अंश पश्चिम की ओर बुध ग्रह सूर्य से 14 अंश पूर्व की ओर दिखाई देंगे. तारामंडल में मेष ,वृष ,मिथुन, कर्क ,सिंह, कन्या के ग्रह नक्षत्र पश्चिम से पूर्व क्षितिज तक इस समय अधिकतम 30 सेकेंड के लिए टिमटिमाते दिखाई देंगे.
सूर्य ग्रहण में कंकणाकृति प्रारंभ होने के 3 -4 सेकेंड पहले ही पश्चिम क्षितिज की ओर एक विशालकाय काली छाया तेज गति से तूफान की तरह भागती दिखेगी. जिसके साथ ही दिन में अंधेरा हो जाएगा.
सूर्य ग्रहण का समय सामान्यता 10:09 से 1:36 तक रहेगा परंतु शास्त्रों के अनुसार समय योग सूर्य ग्रहण का स्पर्श 9:16 से होगा कंकणाकृति प्रात काल 10:19 से शुरू होगी. ग्रहण का मध्य दोपहर 12:10 पर रहेगा कंकणाकृति दोपहर 2:02 पर समाप्त होगी. पूर्ण रूप से 3:04 तक प्रभावी रहेगा. इस प्रकार से ग्रहण काल करीब 5 घंटा 48 मिनट तक रहेगा जबकि कंकणाकृति एक घंटा 17 मिनट तक दिखाई देगी.
बरेली मंडल में सूर्यग्रहण
बरेली मंडल में सूर्य ग्रहण प्रात काल 10:21 से स्पर्श करेगा जिसका मध्यकाल 11:57 पर और पूर्ण काल 1:38 पर होगा. इस प्रकार से बरेली मंडल में करीब 3 घंटे 17 मिनट तक सूर्य ग्रहण रहेगा. ग्रहण का सूतक काल 20 जून की रात्रि 10:20 से रहेगा.
सूर्य ग्रहण का ऐसा काल ज्योतिषीय गणना के अनुसार 900 वर्ष के बाद दुर्लभ योग बन रहा है क्योंकि इस दिन सबसे बड़ा दिन भी होता है. सूर्य ग्रहण में मेष ,सिंह, कन्या, मकर को शुभ वृषभ, तुला, धनु, एवं कुंभ राशि को सामान्य एवं मिथुन, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि को अशुभ फलदाई होगा. अतः यहां पर यह कहना समीचीन होगा कि जातक अपनी जन्म पत्रिका किसी योग्य विद जन से अवश्य दिखाकर परामर्श कर ले.
ज्योतिषी मत
भारत में दिखने वाले इस सूर्य ग्रहण का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा. 18 जून से 25 जून तक 7 दिनों के लिए 6 ग्रह वक्री रहेंगे साथ में गुरु और शनि का एक साथ मकर राशि में दुर्लभ योग भी बनेगा. इससे पहले यह योग 1961 में देखने को मिला था जब गुरु नीच राशि मकर और शनि स्वयं की राशि मकर में एक साथ यति बनाते हुए वक्री हुए थे. इन ग्रहों के वक्री होने से दुनिया भर में महामारी का असर कम होने की उम्मीद की जा सकती है. अर्थव्यवस्था में भी सुधार के योग बन सकते हैं.
ग्रहण काल में प्रभु का जाप भजन एवं धार्मिक ग्रंथों का पाठ पठन एवं श्रवण करना अत्याधिक उचित रहेगा. आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ अत्यंत शुभ कार्य सिद्ध होगा ग्रहण काल के उपरांत संभव हो तो किसी नदी में स्नान आदि करके दलित वर्ग के लोगों को यदि खाद्य वस्तुएं दान में दी जाए तो अनेकों अनेक संकटों से व कष्टों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है.

