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भाई-बहन के सद्भाव, स्नेह और प्रेम का प्रतीक करमा पर्व, शाम में होगी करम डाली की पूजा

by bnnbharat.com
August 29, 2020
in समाचार
भाई-बहन के सद्भाव, स्नेह और प्रेम का प्रतीक करमा पर्व, शाम में होगी करम डाली की पूजा
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रांची:  करमा पर्व झारखंड के प्रमुख त्यौहारों में से एक है और काफी लोकप्रिय है. यह पर्व भादो महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व सिर्फ झारखंड में ही नहीं मनाया जाता बल्कि बंगाल, असम, ओड़िशा, तथा छत्तीसगढ़ में भी पूरे हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जाता है.

करमा पर्व भाई-बहन के सद्भाव, स्नेह और प्रेम का प्रतीक है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को मनाये जाने वाले इस पर्व का इंतजार कुंवारी एवं विवाहित बहनें बेसब्री से करती हैं. विवाहित बहनों को भी करमा पर्व का इंतजार रहता है, क्योंकि विवाहित बहनें करमा की पूजा करने के लिए ससुराल से 1 सप्ताह पहले ही मायके पहुंचती है और करमा पूजा की तैयारी में मशगूल हो जाती है. करमा के लोकगीतों में भाई- बहनों का स्नेह, प्यार, खुशी, दर्द एवं पीड़ा झलकती है. इन गीतों में भाई- बहनों का गहरा रिश्ता जुड़ा हुआ है.

एक सप्ताह तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत तीज पर्व के संपन्न होने के बाद शुरू हो जाती है. तीज का डाला अहले सुबह नदियों एवं तालाबों में विसर्जन की जाती है. वहीं, शाम को कुंवारी बहनों के द्वारा करमा के डाल स्थापित की जाती है. कुंवारी बहनें अपने- अपने घरों से गीत- गाते हुए बांस के डाला लेकर नदी एवं तालाब पहुंचती हैं. यहां वे स्नान कर नदियों एवं तालाबों से डाला में बालू लाकर अखड़ों में रखती है. इस दौरान डाला में विभिन्न तरह के बीजों को जौ के साथ बुनती है.

पूजा के दौरान यह गीत गाती है

करम के जाड़ तक बुनली जावा रे
ओरे सखी सब जावा देलथिन खिंदाय रे.
घोड़वा चढ़िएले एलथिन भइया राजीव रे…
मत कांदो मत खींजो बहिन फुल कुमारी रे
ओरे सखी फिर जावा होतउ हदबुद रे…

इस गीत में भाई- बहन के बीच पौधों को लेकर दर्द एवं पीड़ा झलकती है. अपने भाइयों की सुरक्षा प्रदान करने के लिए बहनें विभिन्न तरह की बीज बोती हैं. जानवर द्वारा पौधों को नुकसान पहुंचाने पर बहनों के दिल में दर्द और पीड़ा उत्पन्न हो जाता है, जिसे देखकर भाई भी अपनी बहन को सांत्वना देते हैं और बहनों की खुशियां लौटाने का संकल्प लेता है. भाई- बहनों को सांत्वना देते हुए कहते हैं कि मत रो बहना तेरी हर खुशी के लिए फसल उगाएंगे. फिर से लहरा उठेंगे तेरे फसल.

करम के लिए डाले में स्थापित किये गये बीजों को जावा कहा जाता है. इस दौरान 7 दिनों तक सुबह- शाम बहनें जावा जोगाती है अर्थात जावा की पूजा- अर्चना कर लोकगीत के साथ गाती और झूमती है.

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