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कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरी

by bnnbharat.com
July 24, 2019
in समाचार
कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरी
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कर्नाटक में तीन हफ्ते से अधिक समय से चल रहे सियासी ड्रामे का अंतिम सीन भी बेहद नाटकीय और हंगामे से भरा रहा। कांग्रेस का बागियों के प्रति गुस्सा दिखा तो वहीं स्पीकर केआर रमेश कुमार की लाचारगी भी नजर आई। जेडीएस-कांग्रेस की सरकार के गिरने के साथ ही राज्य में गठबंधन सरकार के नाकाम होने का अभिशाप भी बरकरार रहा। 18 दिन तक चले नाटक के बीच 6 वोटों के अंतर से कुमारस्वामी की कुर्सी चली गई। अब राज्यपाल बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार गठन का न्योता दे सकते हैं। इस बीच बेंगलुरु पुलिस ने दो दिनों के लिए शहर में धारा 144 लगाई है। विश्वास मत पर वोटिंग से पहले बतौर सीएम अपने आखिरी भाषण में कुमारस्वामी ने उन आरोपों का जवाब देने की कोशिश की, जो 14 महीने के शासन में उन पर लगते रहे हैं। जेडीएस नेता ने कहा कि मैं राजनीति में नहीं आना चाहता था, लेकिन किस्मत मुझे यहां ले आई। विश्वास मत प्रस्ताव के लिए तैयार हूं और खुशी से पद छोड़ दूंगा। उन्होंने विश्वास मत की कार्यवाही के लंबा खिंचने पर भी स्पीकर और सूबे की जनता से माफी मांगी। कहा कि ऐसी मंशा नहीं थी।

वोटिंग की डेडलाइन कई बार मिस होने के बाद मंगलवार को जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सत्ता पक्ष के विधायक गैर हाजिर थे। इस पर स्पीकर ने चेताया कि बहुमत तो छोड़िए आप अपनी विश्वसनीयता भी खो देंगे। बीजेपी को भी निशाना साधने का मौका मिल गया। बीजेपी नेता बी.एस. येदियुरप्पा ने कहा कि सरकार का खुद ही पर्दाफाश हो गया। उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा कि बहुमत न होने के बावजूद आप बेशर्मी से सत्ता में बने हुए हैं। आपको शर्म आनी चाहिए। बीजेपी के जगदीश शेट्टार ने तंज कसा कि कुमारस्वामी ने अपने विधायकों को सदन में उपस्थित रहने की बजाय फाइलें निपटाने को कहा है।

सदन में चले तनाव का असर बाहर भी दिख रहा है। बेंगलुरु में रेस कोर्स रोड पर एक फ्लैट के बाहर कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई। कांग्रेस को सूचना मिली थी कि यहां निर्दलीय विधायक शंकर और नागेश रुके हुए हैं। इस बीच बीजेपी वर्कर भी वहां पहुंच गए। हालात को देखते हुए पुलिस ने बेंगलुरु में धारा 144 लगा दी है। गुरुवार तक शराब की सभी दुकानें, पब और बार बंद रहेंगे। सरकार में आने के बाद से कुमारस्वामी एक होटल में रह रहे थे। इसे लेकर उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। बीजेपी ने जनता का पैसा बर्बाद करने का आरोप लगाया। कुमारस्वामी ने इसका दिलचस्प जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल वह इसी होटल के कमरे में रुके थे। तभी कांग्रेस की ओर से सीएम पद का ऑफर आया। कमरा उनके लिए लकी था, इसलिए वह वहीं रुकने लगे। वहां से कोई बिजनस डील नहीं करते थे।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं फिल्म इंडस्ट्री से हूं, फिल्म प्रोड्यूसर था। यह इसलिए बता रहा हूं क्योंकि विपक्ष ने बहुत अलग व्यवहार किया है। मेरे पिता को सरकार के पतन का कारण बताया जा रहा है। हमने गलती की है।’
बीएस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी की हार के बाद कहा, ‘यह परिणाम लोकतंत्र की जीत है। कर्नाटक की जनता कुमारस्वामी सरकार से त्रस्त थी। मैं लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि राज्य में अब विकास का नया दौर शुरू होगा।’

पूरे सियासी घटनाक्रम के मैन ऑफ द मोमेंट स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा, ‘मैं अपनी जेब में इस्तीफा रखता हूं। अगर आज विश्वास मत स्थगित हो जाता तो मैं त्यागपत्र देने को तैयार था। जिन्हें ढंग से इस्तीफा लिखना भी नहीं आता है, वे स्पीकर के बर्ताव के बारे में बात कर रहे हैं।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. सिद्धारमैया बीजेपी के साथ बागी विधायकों पर भी बरसे। उन्होंने कहा कि हमें छोड़कर जाने वाले विधायक होलसेल ट्रेडिंग का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ’25, 30 और 50 करोड़ की रकम कहां से आ रही है/ बागी विधायकों को अयोग्य घोषित होना चाहिए। उनकी राजनीतिक समाधि बनेगी। 2013 से अब तक जो भी भागा है, चुनाव में हारा है। इस मौके पर इस्तीफा देने वालों के साथ भी यही हाल होगा।’

1983:  जनता पार्टी, बीजेपी, लेफ्ट और अन्य ने मिलकर राज्य में गठबंधन की पहली सरकार बनाई थी, 1 साल 354 दिन ही चली
2004:  कांग्रेस और जेडीएस पहली बार साथ आए और सरकार बनाई, तब भी कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था, 2 साल से पहले गिर गई सरकार
2006:  जेडीएस ने साथी बदला और बीजेपी का दामन थाम लिया, यह सरकार भी दो साल से कम ही चली
2018:  23 मई को सभी को चौंकाते हुए कांग्रेस और जेडीएस ने फिर हाथ थामा और सरकार बनाई, 14 महीने ही चली सरकार

एच.डी. कुमारस्वामी के भाग्य ने एक बार फिर उनका साथ नहीं दिया। वह दोबारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इससे पहले वह 21 महीने तक राज्य के सीएम रहे थे। 28 जनवरी 2006 को कुमारस्वामी की अगुआई में जेडीएस और बीजेपी की साझा सरकार बनी। कुमारस्वामी 4 फरवरी 2006 से 9 अक्टूबर 2007 तक सीएम रहे। साझा सरकार के समझौते के अनुरूप उन्हें पद से हटना था, लेकिन उन्होंने सरकार ही गिरा दी। इससे पहले 2004 में भी कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनी थी। तब भी कुमारस्वामी ने बागी तेवर दिखाए थे। तब सीएम थे कांग्रेस के नेता धर्म सिंह। कुमारस्वामी 42 विधायकों के साथ अलग हो गए और सरकार गिर गई थी।
कांग्रेस अपने बागी 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने पर भी विचार कर रही है। पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन विधायकों ने सदन से तो इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी सदस्य के रूप में अब भी बने हुए हैं। ऐसे में उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है। इस बीच पार्टी ने कर्नाटक मामले को लेकर देशभर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस-जेडीएस की इस 14 महीने पुरानी सरकार के विश्वास मत पर 18 जुलाई से टल रही वोटिंग मंगलवार शाम को हुई तो सत्ता पक्ष को महज 99 वोट मिले। सदन में 204 विधायकों की मौजूदगी में विपक्ष में 105 वोट पड़े। इस तरह एच.डी. कुमारस्वामी 6 वोट से असेंबली का विश्वास खो बैठे। बाद में, कुमारस्वामी ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया।
चार दिन से जारी चर्चा के बाद स्पीकर के.आर. रमेश कुमार ने विधायकों को खड़ा कराकर सत्ताधारी और विपक्षी सदस्यों की गिनती की। ऐसी गिनती शायद पहली बार हुई। सदन के एकमात्र बीएसपी विधायक एन. महेश को पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सरकार के पक्ष में वोट को कहा था, लेकिन वह नदारद रहे। इस पर उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है।

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