रांची: पहले चरण के लॉकडाउन में पीएम मोदी ने कहा था कि ‘जान है तो जहान है’, वहीं दूसरे चरण में ‘जान भी जहान भी’. दूसरे चरण के वक्त ही ग्रीन और ऑरेंज जोन्स में गैरजरूरत की सामानों की दुकानों को खोलने और ग्रामीण इलाकों में कारोबारी व औद्योगिक गतिविधियों को कड़ी शर्तों के साथ इजाजत दे दी गई थी. अब केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि 4 मई से ग्रीन जोन्स में छूट का दायरा और भी बढ़ाया जा सकता है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग सामान्य जनजीवन का हिस्सा बनने वाला है.
देश के कुल 739 जिलों में 307 अब भी कोरोना से अछूते हैं मतलब 40 प्रतिशत से भी ज्यादा. इन जिलों को ग्रीन जोन्स रखा गया है. उम्मीद है कि इन जिलों में 3 मई के बाद फैक्ट्रियों, दुकानों, छोटे-मोटे उद्योगों समेत ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं को भी शर्तों के साथ पूरी तरह खोला जायेगा. केंद्र सरकार द्वारा एक दो दिन में इस पर फैसला लिया जा सकता है लेकिन संबंधित राज्यों में आखिरी फैसला उन राज्यों की सरकारों को लेना है.
माना जा रहा है कि 4 मई से ग्रीन जोन्स में मोबाइल फोन्स, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक, हार्डवेयर, रिपेयरिंग शॉप्स, कपड़ों की दुकानें, रेस्तरां, हेयर कटिंग सैलून जैसी सेवाओं को भी खोला जा सकता है. लेकिन, इन दुकानों पर भीड़ लगाने पर पाबंदी होगी और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन कराया जायेग. पंजाब सरकार ने तो दो हफ्ते के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया है हालांकि ग्रामीण इलाकों में सामान बेचने वाली दुकानों को 50 फीसदी स्टाफ और कुछ अन्य शर्तों के साथ खोलने की इजाजत दी गई है.
अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि ग्रीन जोन्स में 4 मई से सभी फैक्ट्रियों में फिर से काम शुरू करने की इजाजत दी जायेगी. इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी छूट देने पर बात बन सकती है. ईंट भट्ठों को पहले ही छूट दिया जा चुका है. जो ग्रीन जोन में हैं उन जिलों में निर्माण गतिविधियों पर लगा ब्रेक हटाया जा सकता है. कंस्ट्रक्शन के काम में तेजी आ सकती है.
ट्रांसपोर्ट को ग्रीन जोन्स में भी सीमित रूप से खोले जाने की संभावना है. पश्चिम बंगाल में बसों और टैक्सियों को ग्रीन जोन्स के भीतर चलने की इजाजत दिये जाने पर बात बन सकती है. इंटर-स्टेट बस सर्विस बंद रहेगी. इसी तरह अन्य राज्यों में भी छूट के आसार हैं. हालांकि, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना होगा.
जहां कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट्स हैं देश के उन 129 जिलों को रेड जोन्स में रखा गया है यानी वहां रियायतों की गुंजाइश न के बराबर होगी.

