संवाददाता,
रांची: शारदीय नवरात्रि का शुरुआत 29 सितंबर को हो गया. हिंदू धर्म में नवरात्रि या दुर्गा पूजा का बहुत महत्व है. नौ दिन तक चलने वाले नवरात्रि के बाद 10वें दिन विजयादशमी मनाई जाती है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. देवी मां के इन रूपों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और माता सिद्धिदात्रि की पूजा की जाती है. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. नवरात्रि में भक्त इन नौ दिन उपवास या फलाहार करते हैं.
नौ दिनों की इस विशेष पूजा के दौरान मां दुर्गा को क्या भोग लगाएं-
- पहला दिन (शैलपुत्री): नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा का विधान है. इस दिन माता को शुद्ध देसी घी अर्पित करने पर माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों और बीमारी से मुक्ति मिलती है.
- दूसरा दिन (ब्रह्मचारिणी): नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. इस दिन माता को शक्कर, सफेद मिठाई, फलों, मिश्री का भोग लगाना चाहिए.
- तीसरा दिन (चंद्रघंटा): नवरात्रि के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन माता को दूध से बने मिष्ठान, खीर का भोग लगाया जाना चाहिए.
- चौथा दिन (कुष्मांडा): इस त्योहार के चौथे दिन कुष्मांडा स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन माता को मालपुआ का भोग लगाना अच्छा रहता है.
- पांचवां दिन (स्कंदमाता): नवरात्रि के पंचमी के दिन माता को केले का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि इससे भक्तों को अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है.
- छठा दिन (कात्यायनी): नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन माता को शहद का भोग लगाना अच्छा माना जाता है. माना जाता है कि इससे जीवन में मधुरता आती है और मनुष्य की आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है.
- सातवां दिन (कालरात्रि): इस दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है. इस दिन उन्हें गुड़ या इससे बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है. मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने और उसे फिर ब्राह्मणों को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है. साथ ही आने वाले संकटों से भी रक्षा भी होती है.
- आठवां दिन (महागौरी): नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है. इस दिन माता के इस रूप को नारियल का भोग लगाया जाता है.
- नौवां दिन (सिद्धिदात्री): नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है. इस दिन देवी मां को तिल का भोग लगाया जाता है, साथ ही भोग में अनार का भी प्रयोग होता है.

