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जानें कौन हैं रंजन गोगोई ? जिन्होंने अयोध्या विवाद मामले में फैसला दिया

by bnnbharat.com
November 9, 2019
in Uncategorized
जानें कौन हैं रंजन गोगोई ? जिन्होंने अयोध्या विवाद मामले में फैसला दिया
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रांची: 18 नवम्बर 1954 को असम के डिब्रूगढ में जन्में रंजन जी की आयु 64 वर्ष हैं. केशब चंद्र गोगोई इनके पिताजी का नाम है जो 1982 में असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. गोगोई मुख्य न्यायधीश बनने से पूर्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश भी रह चुके हैं. गोगोई की आरम्भिक शिक्षा डॉन बास्को में हुई तथा इसके बाद ये दिल्ली आ गये. यहाँ के सेंट स्टीफन कॉलेज से इन्होने इतिहास में स्नातक की पढाई की तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री प्राप्त की.

3 अक्टूबर 2018 को रामनाथ कोविंद ने इन्हें मुख्य न्यायधीश के पद पर नियुक्त किया.

वे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले व्यक्ति और पहले असमी हैं.

गोगोई का करियर ?

18 नवंबर, 1954 को जन्मे जस्टिस रंजन गोगोई ने 1978 में बार काउंसिल ज्वॉइन की थी. उन्होंने शुरुआत गुवाहाटी हाईकोर्ट से की, 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज भी बने.

इसके बाद वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर जज 2010 में नियुक्त हुए, 2011 में वह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 23 अप्रैल, 2012 को जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

बतौर चीफ जस्टिस अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक मामलों को सुना है, जिसमें अयोध्या केस, NRC, जम्मू-कश्मीर पर याचिकाएं शामिल हैं.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अयोध्या मामले पर फ़ैसला देने वाली पांच जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता की. असम के निवासी गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन उससे पहले उन्हें कई महत्वपूर्ण मामलों में फ़ैसला सुनाया है. जिसमें अयोध्या भूमि विवाद सबसे अहम है.

रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फ़ैसले सुनाए हैं, जिसमें असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मामले शामिल हैं. उन्होंने अभिनेता अमिताभ बच्चन से जुड़े पुनः कर निर्धारण मामले में भी अहम फ़ैसला सुनाया है.

साल 2018 में गोगोई ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंध नेता कन्हैया कुमार पर हुए हमले में विशेष जांच टीम बनाने की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.

गोगोई छोटे-छोटे मसलों पर दायर होने वाली जनहित याचिकाओं को स्वीकार न करने के लिए भी जाने जाते हैं. कई मौकों पर उन्होंने याचिकाकर्ताओं पर ऐसी याचिकाएं दायर करने और अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना भी लगाया है.

मुख्य न्यायाधीश तब विवादों में भी आए जब एक महिला के उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आरोप को निराधार बताया.

मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 17 नवंबर 2019 को समाप्त हो रहा है.सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जस्टिस शरद अरविंद बोबडे को अगला सीजेआई बनाने की केंद्र सरकार से सिफारिश की है.

 

 

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