नई दिल्ली : गार्ड पार्टिकल की तलाश के बाद अब वैज्ञानिक अंतरिक्ष से आए घोस्ट पार्टिकल की तलाश में जुटे हैं. इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए हाल में दुनिया की सबसे गहरी झील में एक नया टेलीस्कोप लगाया गया है. बैकल नामक यह झील रूस में स्थित है. वहीं पर टेलीस्कोप झील में करीब एक मील की गहराई पर इसे लगाया गया है.
ब्रह्माण्ड का सबसे मायावी कण
घोस्ट पार्टिकल को वैज्ञानिक ब्रह्माण्ड का सबसे मायावी कण कहते हैं, क्योंकि इन्हें खोजना और देखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इन अतिसूक्ष्म कणों को न्यूट्रिनो कहते हैं. इनका भार नगण्य होता है और इन पर कोई चार्ज भी नहीं होता है. आज ब्रह्माण्ड में मौजूद ज्यादातर न्यूट्रिनो का निर्माण बिग बैंग (ब्रम्हांड के जन्म) के दौरान हुआ था. इसलिए इन कणों के अध्ययन से वैज्ञानिक यह जानने में सक्षम होंगे कि आज ब्रह्माण्ड ऐसा क्यों दिखता है और डार्क मैटर जैसी रहस्यमय ताकतों के बारे में भी इससे सुराग मिलेंगे.
न्यूट्रिनो की खासियत
न्यूट्रिनो ब्रह्माण्ड में सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाने वाला कण है
हमारे शरीर से हर सेकेंड 10 ट्रिलियन न्यूट्रिनो कण गुजर जाते हैं
इनका पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि ये अवशोषित किए बिना पदार्थ से गुजरते हैं
न्यूट्रीनो चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित नहीं होते हैं और उनके तटस्थ चार्ज का मतलब है कि वे किसी भी चीज के साथ इंट्रैक्ट नहीं होते हैं
ये प्रकाश की रफ्तार से गति करते हैं
खोज के लिए आदर्श है यह झील
रूस की लेक बैकल वैज्ञानिकों को न्यूट्रिनो का निरीक्षण करने के लिए एक आदर्श माध्यम प्रदान करती है. जब न्यूट्रिनो पानी में गति करते हैं, तो वे चेरनकोव विकिरण के रूप में जाने वाली ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं, जो प्रकाश पैदा करती है. इसलिए वैज्ञानिकों ने लेक बैकल को चुना. इसकी गहराई और साफ पानी प्रकाश के इन झटकों का अवलोकन करने की उनकी क्षमता को अधिकतम करते हैं.
बेहद विशाल टेलीस्कोप
झील में लगा यह बैकल-गिगाटन वाल्यूम डिटेक्टर टेलीस्कोप उत्तरी ध्रुव में लगा सबसे विशाल न्यूट्रिनो टेलिस्कोप है. यह डिटेक्टर टेलिस्कोप झील में 0.4 और 0.8 मील (700 से 1300 मीटर के बीच) की गहराई के बीच लगा हुआ है. यह टेलीस्कोप एक मील के दसवें हिस्से के बराबर चौड़ी, लंबी और ऊंची है.
2015 से हो रहा प्रोजेक्ट पर काम
बैकल झील में लगे इस डिटेक्टर के निर्माण का प्रोजेक्ट 2015 में शुरू हो गया था. इस टेलीस्कोप की कीमत 34 मिलियन अमेरिकी डॉलर है और चेक रिपब्लिक, जर्मनी, पोलैंड, रूस और स्लोवाकिया इस पर मिलकर काम कर रहे थे.

