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कोलेबिरा विधानसभा : वापसी और टिके रहने के बीच संघर्ष की संभावना

by bnnbharat.com
December 3, 2019
in समाचार
कोलेबिरा विधानसभा : वापसी और टिके रहने के बीच संघर्ष की संभावना

कोलेबिरा विधानसभा : वापसी और टिके रहने के बीच संघर्ष की संभावना

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खूंटी: कोलेबिरा विधानसभा में संघर्ष वापस आने और टिके रहने के बीच होने की संभावना है. यहां से झारखंड पार्टी के विधायक रहे एनोस एक्‍का अपनी बेटी के जरिए विधायक पद दुबारा पाना चाहते हैं.

उपचुनाव में कांग्रेस का विजय पताका फहराने वाले नमन बिक्‍सल कोनगाड़ी विधायकी कायम रखना चाहते हैं. इसके बीच दोनों में संघर्ष हो रहा है. इस संघर्ष को त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में भाजपा सहित अन्‍य दल लगे हैं.

इस सीट पर दूसरे चरण में 7 दिसंबर को चुनाव होना है. कोलेबिरा विधानसभा सीट खूंटी लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है. यह सीट अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है.

उपचुनाव में जीते नमन

इस विधानसभा सीट पर कब्‍जे को लेकर झारखंड पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी जंग होती रही है. 2005 के चुनाव में यहां से जनक्रांति पार्टी के एनोस एक्‍का विधायक चुने गए, फिर 2009 और 2014 में भी एनोस एक्‍का झारखंड पार्टी से यहां से चुनाव लड़े और विधायक बने.

हत्‍या के एक मामले में उन्‍हें कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद 2018 के इस सीट पर उपचुनाव हुए. इसमें कांग्रेस ने जीत हासिल की. कांग्रेस नेता नमन बिक्सल कोनगाड़ी यहां से विधायक चुने गए. उप चुनाव में एनोस की पत्‍नी खड़ी हुई थी.

ये हैं प्रत्‍याशी

झारखंड पार्टी से आईरीन एक्का, कांग्रेस से नमन बिक्सल कोनगाड़ी, भाजपा से सुजन जोजो, राष्‍ट्रीय सेंगल पार्टी से अनिल कंडुलना, निर्दलीय डेविड पवन केरकेट्टा, झाविमो से दीपक केरकेट्टा, प्यारा और शिवचन मांझी, बहुजन समाज पार्टी से सुरेंद्र सिंह हैं.

अब तक के विधायक

इस विधानसभा से 1952 के बाद हुए चुनाव में एसके बागे ही ऐसे प्रत्याशी हुए, जो छह बार निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे.

वे 1952 से 62 तक लगातार तीन बार विधायक रहे. इसके बाद 1969, 1972 एवं 1980 में भी विधायक बनें. इसके पूर्व 1967 में एनई होरो और 1977 में वीर सिंह मुंडा विधायक बनें.

वीर सिंह मुंडा 1984 के उपचुनाव और 1985 में हुए आम चुनाव में जीत दर्ज कर तीन बार विधायक बनें.

इसके बाद 1990 में कांग्रेस पार्टी से उम्मीदवार थियोडोर किड़ो ने जीत दर्ज की. फिर 1995 में ये सीट झामुमो के खाते में चली गई और बसंत लोंगा विधायक बने.

वीर सिंह मुंडा के बाद एनोस एक्का लगातार 2005 से 2014 तक तीन बार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे और मंत्री का पद भी संभाला.

2018 में कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधायकी चली गई. यहां हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी मेनोन एक्का हार गई. कांग्रेस प्रत्याशी नमन विक्सल कोनगाड़ी विधायक बने.

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